क्लर्क की नौकरी करते थे अमरीश पुरी, पहली नज़र में ही उर्मिला दिवेकर को दे बैठे थे दिल, लेकिन खिलाफ हो गया था परिवार

अमरीश पुरी जब फिल्मों में नहीं आए थे तब वह एक मामूली से क्लर्क थे। वह अपनी 9 से 6 वाली जॉब में बेहद खुश रहते थे।

Amrish Puri, अमरीश पुरी, Amrish Puri love Story, Amrish Puri लेजेंड एक्टर अमरीश पुरी (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस आरकाइव)

हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार अमरीश पुरी को उनके ‘निगेटिव’ किरदारों के लिए खूब जाना जाता था। ‘मोगेंबो’ बन कर उन्होंने बॉलीवुड के बेस्ट विलेन्स की लिस्ट में अपना नाम टॉप पर दर्ज कराया। अमरीश पुरी बड़े पर्दे पर अपनी छवि को लेकर काफी मशहूर थे, लेकिन असल जिंदगी में वह अपने फिल्मी किरदारों से बेहद अलग थे। अमरीश पुरी जब फिल्मों में नहीं आए थे तब वह एक मामूली से क्लर्क थे। वह अपनी 9 से 6 वाली जॉब में बेहद खुश रहते थे।

फिल्मों में अकसर हीरो हिरोइन के बीच दीवार बन कर खड़े होने वाले अमरीश अपनी रियल लाइफ में बेहद रोमांटिक किस्म के थे। अमरीश पुरी ने उस जमाने में लव मैरेज करी थी। अपने प्यार की चाहत में वह अपने परिवार से भी बगावत पर उतर आए थे। दरअसल, अमरीश पुरी एक एंश्योरेंस कंपनी में काम किया करते थे। जहां उन्हें उनका प्यार मिला था। तब वह नहीं जानते थे कि जिस खूबसूरत महिला से वह टकराए हैं उनसे उनका दिल लग जाएगा। अमरीश पुरी जिनसे टकराए थे उनका नाम था उर्मिला दिवेकर। पहली नजर की मुलाकात के बाद अमरीश को उर्मिला से प्रेम हो गया था।

अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी लेजेंड एक्टर की यादें अकसर शेयर करते रहते हैं। अमरीश पुरी के पोते ने एक्टर के बारे में एक इंटरव्यू में बताया – ‘दादू एक इंश्योरेंस कंपनी में क्लर्क का काम करते थे। वे दादी से वहीं मिले थे। दोनों को प्यार हुआ। लेकिन हर लव स्टोरी में कोई न कोई ट्विस्ट जरूर होता है।’

पीपींग मून को दिए इंटरव्यू में वर्धन ने बताया – ‘दादी साउथ इंडियन थीं और दादू पंजाबी। जब दोनों के परिवारों को पता चला कि दादू दादी एक दूसरे को पसंद करते हैं तो उन्हें ये बात बिलकुल अच्छी नहीं लगी। दोनों के परिवार वाले इस शादी के खिलाफ हो गए। लेकिन दादी दादू ने हार नहीं मानी और उन्होंने अपने परिवारों को कन्वेंस किया। इसके बाद दोनों की शादी परिवारों की रजामंदी से हुई।’

उन्होंने आगे बताया कि ‘दादू ने अपनी जिंदगी में बहुत मेहनत और स्ट्रगल किया। वह हीरो बनना चाहते थे, लेकिन वह विलेन बन गए। उस वक्त उनके पास सिर्फ एक दादी थीं जिन्होंने उन्हें अपना पूरा सपोर्ट दिया। जब दादू इंडस्ट्री में स्ट्रगल कर रहे थे, तब दादी घर चलाने के लिए काम करती थीं। ओवरटाइम कर कर के दादी परिवार का भरण पोषण करती थीं।’

उन्होंने आगे कहा- ‘जब दादू 41 साल के हुए तब उनकी किस्मत का तारा चमका। दादू हमेशा कहा करते थे- ‘मैं हीरो बनूं या न बनूं लेकिन इस घर का हीरो तो मेरी बीवी ही है।’