ग्रीन एनर्जी को लेकर अंबानी से कड़ी ‘टक्कर’, अडानी ने बताया चार साल का बड़ा प्लान

जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर समिट में गौतम अडानी ने अपने प्लान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि अगले चार वर्ष में अपने रिन्‍यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

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रिन्‍यूएबल ग्रीन एनर्जी को लेकर भारत के दो  अरबपति- मुकेश अंबानी और गौतम अडानी आमने-सामने हैं। कुछ दिन पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने तीन वर्ष में स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन ईंधन में 75,000 करोड़ रुपये यानि 10 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की थी। इसको देखते हुए अब गौतम अडानी ने भी 20 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है।

गौतम अडानी ने मंगलवार को कहा कि उनका समूह अगले 10 साल में रिन्‍यूएबल ग्रीन एनर्जी प्रोडक्‍शन और पाट्र्स के निर्माण में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा तथा दुनिया में सबसे सस्ते ग्रीन इलेक्ट्रॉन का उत्पादन करेगा। अडानी ग्रुप के प्रमुख ने जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर समिट में अपने संबोधन के दौरान यह जानकारी दी।

जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर समिट में गौतम अडानी ने अपने प्लान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि अगले चार वर्ष में अपने रिन्‍यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में प्रवेश करने, सभी डेटा सेंटर को नवीकरणीय ऊर्जा से चलाने, 2025 तक अपने बंदरगाहों के कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की भी योजना है।

उन्होंने कहा कि 20 अरब डॉलर का निवेश नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, कलपुर्जों के निर्माण, ट्रांसमिशन और वितरण के क्षेत्रों में किया जाएगा। उद्योगपति ने कहा कि अडानी ग्रुप की एकीकृत मूल्य श्रृंखला, हमारे आकार और अनुभव के चलते हम दुनिया में सबसे सस्ते ग्रीन इलेक्ट्रॉन के निर्माता बनने की राह पर हैं।

इससे पहले हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी ने भी तीन वर्ष में स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन ईंधन में 75,000 करोड़ रुपये (10 अरब डॉलर) निवेश की घोषणा की है। अंबानी ने इस महीने कहा था कि एक दशक में रिन्युएबल ऊर्जा से एक डॉलर प्रति किलोग्राम की लागत पर हाइड्रोजन बनाई जा सकती है। हाइड्रोजन में कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है और इसे उद्योग और ऑटोमोबाइल में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।