चीन के दबाव में झुका World Bank, बदल दी रैंकिंग- जांच में निकला सच; कौशिक बसु बोले- हमारे समय भी पड़ता था दबाव

वैसे, विश्व बैंक में पूर्व चीफ इकनॉमिस्ट ने यह भी बताया कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। दुख की बात है कि अब यह चीज बदल गई है।

world bank, china, india सूत्र ने समाचार एजेंसी पीटीआई भाषा को यह भी बताया, “भारतीय डेटा में कोई अनियमितता नहीं पायी गई। भारत दुनिया के लिए पसंदीदा निवेश गंतव्य और एक विश्वसनीय व भरोसेमंद गंतव्य बना हुआ है, जबकि चीन का आकर्षण कम हो रहा है।” (प्रतीकात्मक फोटोः unsplash)

चीन के दबाव में आकर विश्व बैंक ने डूइंग बिजनेस रैंकिंग बदल दी थी। यह बात जांच में सच निकली है। इसी बीच, अमेरिका के कॉर्नल विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और विश्व बैंक में पूर्व चीफ इकनॉमिस्ट कौशिक बसु बोले कि उनके समय में भी सरकारों की ओर से दबाव पड़ता था।

बसु ने इस बाबत ट्वीट किया, “विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रैंकिंग में हेराफेरी की खबर चौंकाने वाली है। साल 2012 से 2016 तक डीबी मेरे प्रभार में था। सरकारों की तरफ से दबाव था। हालांकि, हमने कभी हार नहीं मानी। दुख की बात है कि अब यह चीज बदल गई है। काश मैं भारत के क्रेडिट में कुछ जोड़ सकता, मुझ पर कभी भी भारत की सरकारों का दबाव नहीं था- वर्तमान या पूर्व।”

समाचार एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को शुक्रवार (17 सितंबर, 2021) को एक सरकारी सूत्र ने बताया कि विश्व बैंक समूह द्वारा दुनिया के देशों में ‘कारोबार सुगमता रैंकिंग रिपोर्ट’ का प्रकाशन बंद करने के फैसले ने चीन की धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर दिया है। इससे वैश्विक कंपनियों को अपना विनिर्माण स्थल भारत में शिफ्ट करने के काम में तेजी आएगी।

बता दें कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप ने अनियमितताओं के आरोपों के बाद विभिन्न देशों में निवेश के माहौल से जुड़ी रिपोर्ट का प्रकाशन बंद करने का फैसला किया है। यह फैसला, 2017 में चीन की रैंकिंग को ऊपर करने की खातिर कुछ टॉप बैंक अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर दबाव डाले जाने के कारण हुई डेटा संबंधी अनियमितताओं के सामने आने के बाद लिया गया।