चुनावी समर में बगैर मास्क के घूमते थे सरमा, कहा था- बेकार में पैनिक क्यों कर रहे हो? जब होगा, तब बता दूंगा

चुनाव प्रचार के दौरान जब हेमंत बिस्व सरमा से पूछा गया कि क्या मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं है। तो उन्होंने कहा कि क्यों बेकार का पैनिक क्रिएट करें। जब होगा तो मैं बता दूंगा लोगों को कि आज से मास्क पहनो।

himant biswa sarma, bjp, corona

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा को दूसरी बार मिली जीत के बाद रविवार को विधायक दल की हुई बैठक में हेमंत बिस्व सरमा को नेता चुन लिया गया है। हेमंत बिस्व सरमा राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद सरमा की चुनौती राज्य में धीरे धीरे फ़ैल रहे कोरोना संक्रमण को रोकने की भी होगी। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान हेमंत बिस्वा सरमा ने कोरोना को लेकर अटपटा बयान देते हुए कहा था कि असम में मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं है। जब जरूरत होगी तो बता दिया जाएगा।

असम विधानसभा चुनाव प्रचार के समय द लल्लनटॉप को दिए गए इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार सौरभ द्विवेदी ने उन्हें मास्क पहनने को लेकर टोका तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि मास्क की कोई जरूरत नहीं है। नहीं है तो नहीं है, मैं क्या करूं। साथ ही जब उनसे पूछा गया कि केंद्र सरकार तो लोगों से मास्क पहनने का आग्रह कर रही है तो उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपना निर्देश दे लेकिन असम के विषय में जब हम बात करते हैं तो कोरोना आज के दिन में नहीं है।

इसके बाद जब दोबारा हेमंत बिस्व सरमा से कहा गया कि क्या मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं है। तो उन्होंने कहा कि क्यों बेकार का पैनिक क्रिएट करें। जब होगा तो मैं बता दूंगा लोगों को कि आज से मास्क पहनो। आगे उन्होंने अटपटा बयान देते हुए कहा कि अभी हमें इकोनॉमी को रिवाइव करना है। मास्क पहनेगा तो पार्लर कैसे चलेगा। ब्यूटी पार्लर भी चलना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब कोविड होगा तो सबको मास्क पहनना पड़ेगा नहीं तो 500 रुपये फाइन का देना होगा।

इसके अलावा उन्होंने यह कहा कि अभी तो हम बिहू भी करेंगे वो भी धूमधाम से, मेरा विश्वास है कि कोविड नहीं होगा। साथ ही उनसे जब यह पूछा गया कि लोग कहते हैं चुनाव आता जाएगा और कोरोना जाता जाएगा। तो सरमा ने कहा कि पहले हुए चुनावों  को लेकर भी कई लोगों ने कहा था कि कोरोना तेजी से फैलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस चुनाव के बाद भी ऐसा नहीं होगा।  

 

हेमंत बिस्व सरमा ने छात्र राजनीति की शुरुआत असम स्टूडेंट्स यूनियन से की। बाद में उन्होंने 1991 में कांग्रेस में अहम पद सौंपा गया और उनकी राजनीतिक एंट्री हुई। सरमा का सुनहरा दौर 2001 में तरुण गोगोई के सीएम बनने के बाद शुरू हुआ। 2002 में वे सरकार में मंत्री भी बने। 2015 में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का साथ थाम लिया। इसके बाद 2016 में उन्होंने भाजपा को जबरदस्त जीत दिलाई और पार्टी में अहम पद हासिल कर लिया। हालांकि, तब भाजपा ने उनकी जगह केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को असम का मुख्यमंत्री बनाया था।