चुनौती: कोरोना के डेल्टा स्वरूप के खिलाफ समूह प्रतिरक्षा मुश्किल, पहले की तुलना में 30 से 70 फीसदी तक ज्यादा संक्रामक

वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने कहा कि दिल्ली की कुल सीरो-संक्रमण दर 56.1 फीसद है जिससे भविष्य में विषाणु की लहर आने पर सामूहिक प्रतिरक्षा के जरिए ही कुछ सुरक्षा मिलेगी।

Covid, Delta Variant लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया, यू.एस. के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में टर्मिनल 5 के अंदर सुरक्षात्मक मास्क पहने यात्रियों की जांच करते अधिकारी। (bloomberg)

दिल्ली में इस साल कोविड-19 के गंभीर प्रकोप से पता चला कि सार्स-सीओवी-2 विषाणु के किसी अन्य स्वरूप से पहले संक्रमित हो चुके लोगों को विषाणु का डेल्टा स्वरूप पुन: संक्रमित कर सकता है। वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने कहा कि विषाणु के इस स्वरूप के खिलाफ सामूहिक प्रतिरक्षा क्षमता (समूह प्रतिरक्षा) का विकास बहुत चुनौतीपूर्ण है। पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि डेल्टा स्वरूप दिल्ली में सार्स-सीओवी-2 के पिछले स्वरूपों की तुलना में 30 से 70 फीसद तक अधिक संक्रामक है।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली की कुल सीरो-संक्रमण दर 56.1 फीसद है जिससे भविष्य में विषाणु की लहर आने पर सामूहिक प्रतिरक्षा के जरिए ही कुछ सुरक्षा मिलेगी। सामूहिक प्रतिरक्षा क्षमता से रोग से परोक्ष सुरक्षा मिलती है और यह तब विकसित होती है जब पर्याप्त फीसद आबादी में संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।

हालिया अध्ययन में महामारी के प्रकोप को समझने के लिए जिनोमिक और महामारी विज्ञान संबंधी आंकड़ों और गणितीय माडल का उपयोग किया गया। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद के इंस्टीट्यूट आफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (सीएसआइआर-आइजीआइबी) के नेतृत्व में यह अध्ययन कैंब्रिज विश्वविद्यालय, इम्पीरियल कालेज आफ लंदन और कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया।

सह अध्ययनकर्ता कैंब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रवि गुप्ता ने कहा, ‘विषाणु के प्रकोप को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रतिरक्षा क्षमता की अवधारणा बेहद महत्त्वपूर्ण है। लेकिन दिल्ली में हालात दिखाते हैं कि कोरोना विषाणु के पहले के स्वरूपों से संक्रमित होना डेल्टा स्वरूप के खिलाफ सामूहिक प्रतिरक्षा क्षमता प्राप्त करने के लिहाज से पर्याप्त नहीं है।’

जनवरी 2021 तक अल्फा स्वरूप किन्हीं-किन्हीं मामलों में पाया गया, विशेषकर विदेश से आए लोगों में। यह स्वरूप सबसे पहले ब्रिटेन में सामने आया था। मार्च 2021 तक यहां इस स्वरूप के मामले 40 फीसद हो गए।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद अप्रैल में डेल्टा स्वरूप से जुड़े मामलों में तेज इजाफा हुआ। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि संक्रमण की चपेट में आ चुके लोगों की डेल्टा स्वरूप से 50-90 फीसदी ही रक्षा हो पाती है।

सीएसआइआर-आइजीआइबी में वरिष्ठ अध्ययनकर्ता अनुराग अग्रवाल ने कहा, ‘इस अध्ययन से डेल्टा स्वरूप के वैश्विक प्रकोप, विशेषकर ऐसी आबादी में जिनका टीकाकरण हो चुका है, उसे समझने में मदद मिली। डेल्टा स्वरूप टीकाकरण करवा चुके लोगों या पहले संक्रमित रह चुके लोगों के जरिए फैल सकता है।’ पुन: संक्रमण के वास्तविक साक्ष्य प्राप्त करने के लिए सीएसआइआर द्वारा इस अध्ययन में शामिल किए गए लोगों की जांच की गई।