छत्‍तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को चुनौती देेेने वाले टीएस सिंहदेव की कार से जवाहर लाल नेहरू ने की थी इलाहाबाद में रैली, जान‍िए क‍िस्‍सा

सरगुजा रियासत के पूर्व राजा टीएस सिंहदेव पहली बार 2008 में विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। उसके बाद से उन्होंने लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीता।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में उपजे विवाद को समाप्त करने के लिए बीते दिनों भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव को राहुल गांधी से मिलने के लिए भी बुलाया गया था। लेकिन मुलाकात के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया। (एक्सप्रेस फोटो: प्रेमनाथ पांडेय)

मुख्यमंत्री बदलने को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। चुनौती देने वाले नेताओं की फेहरिस्त में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव सबसे पहले खड़े हैं। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में उपजे विवाद को ख़त्म करने के लिए बीते दिनों दोनों नेताओं को दिल्ली भी तलब किया गया था लेकिन इसके बावजूद कलह समाप्त नहीं हुआ। अब कांग्रेस के विधायकों को दिल्ली दरबार में बुलाया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के द्वारा खुद को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग को लेकर यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान जल्दी ही इस मुद्दे पर फैसला ले सकती है। भूपेश बघेल को चुनौती देने वाले टीएस सिंहदेव का परिवार भी राजनीतिक रूप से काफी सशक्त रहा है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से भी सिंहदेव परिवार की नजदीकियां रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तो टीएस सिंह देव की कार से इलाहाबाद में एक रैली भी की थी।

बसंत कुमार तिवारी की किताब “मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़” के अनुसार एक बार भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एक रैली के लिए इलाहाबाद आए थे। इस दौरान उनके बगल से एक लाल रंग की स्पोर्ट्स कार फर्राटा भरती हुई निकली। स्पोर्ट्स कार की छत खुली हुई थी. लाल रंग की वह कार जवाहरलाल नेहरू के आंख में बस गई। उन्होंने अपने अफसर से वह गाड़ी लाने को कहा। जब अफसरों ने गाड़ी के पता किया तो पता चला कि वह गाडी सरगुजा रियासत के महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव के बेटे और टीएस सिंहदेव के पिता मदनेश्वर शरण सिंह की है। हालांकि उस गाड़ी को टीएस सिंहदेव चला रहे थे। सिंहदेव उस दौरान इलाहाबाद में ही पढाई किया करते थे। बाद में जवाहरलाल नेहरू ने उनसे वह गाड़ी मांग कर इलाहाबाद में रैली की।  

रैली के बाद रात को डिनर आयोजित किया गया। इस डिनर में टीएस सिंहदेव को आमंत्रित नहीं किया गया था। रात्रि भोज के दौरान जब जवाहरलाल नेहरू ने टीएस सिंहदेव के दादा महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव से उनके ना आने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि टीएस सिंहदेव को आमंत्रित नहीं किया गया है। इसके बाद फ़ौरन जवाहरलाल नेहरू ने अपने अधिकारियों से टीएस सिंहदेव को ढूंढ कर लाने के लिए कहा। जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें खोजना शुरू कर दिया। बाद में वे एक सिनेमाघर में मिले। अधिकारी शो को बीच में रुकवाकर टीएस सिंह देव को जवाहरलाल नेहरू के पास ले गए।

टीएस सिंहदेव का जन्म भी इलाहाबाद में ही हुआ था। उनके पिता महाराज मदनेश्वर शरण सिंहदेव मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव थे और उनकी माता भी मंत्री रहीं थी। टीएस सिंहदेव 1983 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। उसी साल वे अंबिकापुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष चुने गए थे। सरगुजा रियासत के पूर्व राजा टीएस सिंहदेव पहली बार 2008 में विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। उसके बाद से उन्होंने लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीता। वे छत्तीसगढ़ के सबसे अमीर विधायक हैं और 500 करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं।