जजों-वकीलों की सुरक्षा के लिए BCI की सुप्रीम कोर्ट से स्पेशल फोर्स गठित करने की मांग, कहा- खतरे में है सिस्टम

काउंसिल के प्रस्ताव में कहा गया है, “अदालत के सुरक्षा अधिकारियों को परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और न्यायिक प्रणाली के उचित कामकाज से पूरी तरह परिचित होना चाहिए।”

court, supreme court तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट से उच्च और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों और वकीलों की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल फोर्स गठित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 146 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने के लिए कहा है। काउंसिल ने 2019 में दिल्ली की तीस हजारी अदालत में पुलिस और वकीलों के बीच झड़प और उत्तर प्रदेश की बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष की आगरा कोर्ट परिसर के अंदर हत्या सहित अदालत परिसर के अंदर हिंसक घटनाओं की पृष्ठभूमि में एक याचिका दायर की है।

बार काउंसिल ने कहा है, “हाल के दिनों में, हमारी कानूनी प्रणाली को ब्लैकमेल, उत्पीड़न और शारीरिक हमलों जैसे खतरों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में यह संपूर्ण न्याय प्रशासन प्रणाली के स्वतंत्र कामकाज के लिए खतरा है, और इस तरह इसकी प्रभावशीलता में बाधा उत्पन्न होगी। जिसके चलते पूर्वाग्रह, दबाव और धमकी से मुक्त होकर फैसले नहीं लिए जा सकेंगे। इनमें से कई हमले प्रणाली के कमजोर और कम संरक्षित वर्गों, यानी जिला और सत्र न्यायालयों के खिलाफ किए गए हैं। इस तबके के लिए आवश्यक ढांचा और एक फुलप्रूफ सुरक्षा प्रणाली बनाना महत्वपूर्ण है।”

काउंसिल ने सुझाव दिया है कि संसद भवन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की देखभाल के लिए पहले से ही राज्य सभा की संसद सुरक्षा सेवा और लोकसभा सचिवालय के रूप में एक विशेष सुरक्षा प्रणाली है। इसी तरह, भारत के सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों में एक न्यायिक सुरक्षा सेवा स्थापित की जा सकती है।

हलफनामे में कहा गया है, “न्यायालय परिसर को एक विशेष क्षेत्राधिकार पुलिस बल प्रदान करने की योजना पर विचार किया जा सकता है क्योंकि स्थानीय पुलिस जो जिला परीक्षण न्यायालयों को सुरक्षा प्रदान करती है, हथियारों से लैस नहीं है और अदालत की सुरक्षा को संभालने के लिए प्रशिक्षित नहीं है। “

अपने हलफनामे में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 50 के प्रावधानों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका के हितों की रक्षा के लिए एक “विशेष/समर्पित सुरक्षा प्रणाली” की आवश्यकता है। काउंसिल ने आगे सुझाव दिया है कि प्रत्येक कोर्ट हॉल के अंदर निहत्थे सुरक्षाकर्मी भी हो सकते हैं।

काउंसिल के प्रस्ताव में कहा गया है, “अदालत के सुरक्षा अधिकारियों को परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और न्यायिक प्रणाली के उचित कामकाज से पूरी तरह परिचित होना चाहिए।”

काउंसिल ने यह भी कहा है कि उसने देश में वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों का सुझाव देते हुए एक मसौदा वकील संरक्षण विधेयक तैयार किया है। मसौदा सभी राज्य बार काउंसिल और अन्य हितधारकों के परामर्श से तैयार किया गया है, और इसे केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय के समक्ष रखा गया है। मालूम हो कि झारखंड के धनबाद में एक जज की गाड़ी से कुचले जाने के बाद हाल ही में जजों की सुरक्षा का मामला फिर से सुर्खियों में आया है।