जब आज़ादी की लड़ाई में गिरफ्तार हुए दिलीप कुमार, अंग्रेजों के विरुद्ध उठाया था ऐसा कदम

एक बार किसी बात को लेकर पिता से दिलीप कुमार का झगड़ा हो गया और वो घर छोड़कर पुणे चले गए। दिलीप कुमार ने यही रहते हुए भारत की आजादी के लिए गिरफ्तारी दी थी।

दिलीप कुमार आज़ादी के लड़ाई में गिरफ्तार हुए थे (Photo-Indian Express Archive)

98 वर्षीय दिलीप कुमार इन दिनों खराब सेहत से जूझ रहे हैं। 11 दिसंबर 1922 को जन्में अभिनेता ने भारतीय फ़िल्म जगत को कई बेहतरीन फिल्में दी। लेकिन दिलीप कुमार का यह सपना नहीं था कि वो फिल्मों में काम करें बल्कि वो अपने पिता के बिजनेस में हाथ बटाया करते थे। उनके पिता फलों के व्यापारी थे और दिलीप कुमार भी बिजनेस में पिता की मदद करते थे। लेकिन एक बार किसी बात को लेकर पिता से उनका झगड़ा हो गया और वो घर छोड़कर पुणे चले गए। दिलीप कुमार ने यही रहते हुए भारत की आजादी के लिए गिरफ्तारी दी थी।

इस बात का जिक्र दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा ‘द सबस्टैंस एंड द शैडो’ में किया है। उन दिनों भारत पर अंग्रेजों का शासन था और हर तरफ से विरोध के स्वर बुलंद हो रहे थे। दिलीप कुमार पुणे आए और गुजारा करने के लिए उन्होंने पुणे ब्रिटिश आर्मी कैंटीन में नौकरी कर ली। उन्हें अंग्रेजी की अच्छी समझ थी जिस कारण उन्हें कैंटीन असिस्टेंट के पद पर रख लिया गया। कैंटीन के रहने के दौरान ही उन्होंने खुद का सैंडविच काउंटर खोला था। अंग्रेज़ उनकी सैंडविच को बहुत पसंद करते थे।

लेकिन इसी बीच उन्होंने कैंटीन में एक दिन भारत की आजादी के समर्थन में एक आयोजन किया। इस आयोजन में दिलीप कुमार ने आज़ादी की लड़ाई का समर्थन किया जिसके बाद अंग्रेज़ों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उनका काम भी बंद हो गया था और बाद में वापस उन्हें अपने पिता के पास मुंबई लौटना पड़ा था।

दिलीप कुमार को फिल्मों में आने की सलाह एक्ट्रेस देविका रानी ने दी थी। उन्होंने ही दिलीप कुमार जिनका असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान था, को उनका ये नाम दिया था। बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी ने दिलीप कुमार को 1250 रुपए में अपने यहां नौकरी पर रखा था।

दिलीप कुमार ने साल 1944 में फिल्म ज्वार भाटा से अपने करियर की शुरुआत की। फिल्म बुरी तरह पिट गई। कई और फिल्मों में भी दिलीप कुमार को असफलता का मुंह देखना पड़ा और तब आई फिल्म ‘मिलन’। इस फ़िल्म की सफलता ने दिलीप कुमार को बहुत लोकप्रियता दिलाई।

इसके बाद तो जैसे उन्होंने सफल फिल्मों की झड़ी लगा दी। जुगनू, शहीद, दाग, आन, देवदास, नया दौर, मुगले आजम आदि फिल्मों से दिलीप कुमार शीर्ष अभिनेताओं में गिने जाने लगे थे। वो हिंदी सिनेमा के ट्रेजेडी किंग माने गए।