जब पत्रकार से बोलने लगे राकेश टिकैत, उंगली हिलाना भी आपका स्टंट, एक दूसरे का उड़ाने लगे मजाक

केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 25 सितंबर को ‘भारत बंद’ का आह्वान किये जाने की शुक्रवार को घोषणा की।

Rakesh Tikait, BKU, National News BKU के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

एबीपी न्यूज के शिखर सम्मेलन में एंकर ने जब भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से कहा कि कई किसान आपसे अलग हो गए हैं। आप उनको तो अपने साथ रख नहीं पा रहे हैं,उनको समझा नहीं पा रहे हैं। इस पर राकेश टिकैत कहने लगे कि आप किनकी बात कर रही हैं? इस पर एंकर कहने लगीं कि अब आप उनको किसान भी नहीं मानेंगे।

टिकैत कहने लगे कि आपकी आवाज नहीं आ रही है। यह भी आपका स्टंट है क्या उंगली हिलाकर बात करना ? फिर आप कहोगे कि राकेश टिकैत ने सवालों के जवाब नहीं दिए। इस पर एंकर कहनी लगीं कि घबरा क्यों रहे हैं दोबारा पूछ लेते हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि तुम चैनल वाले तो पूरी तरह से सरकार के एजेंडे पर काम कर रहे हो। राकेश टिकैत ने कहा कि बीजेपी के सारे प्रवक्ता घर पर बैठ गए हैं और सारे चैनलों के एंकर प्रवक्ता बन गए हैं।

मालूम हो कि केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 25 सितंबर को ‘भारत बंद’ का आह्वान किये जाने की शुक्रवार को घोषणा की। एसकेएम ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य पिछले साल नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन को और अधिक मजबूती और विस्तार देना है।

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एसकेएम के आशीष मित्तल ने कहा, “हम 25 सितंबर को ‘भारत बंद’ का आह्वान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह पिछले साल इसी तारीख आयोजित इसी तरह के ‘बंद’ के बाद हो रहा है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह पिछले साल की तुलना में ज्यादा सफल रहेगा, जो कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच हुआ था।”

शुक्रवार को संपन्न हुए किसानों के अखिल भारतीय सम्मेलन के समन्वयक ने कहा कि दो दिवसीय कार्यक्रम सफल रहा और 22 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसमें न सिर्फ कृषि संघों के बल्कि महिलाओं, मजदूरों, आदिवासियों के साथ-साथ युवाओं और विद्यार्थियों के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए।

सम्मेलन के दौरान, पिछले नौ महीनों से चल रहे किसानों के संघर्ष पर चर्चा और विचार-विमर्श हुआ, और इसने कृषि कानूनों के खिलाफ उनके आंदोलन को अखिल भारतीय आंदोलन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। मित्तल ने कहा, “सम्मेलन के दौरान, इस बात पर चर्चा की गई कि सरकार कैसे कॉरपोरेट समर्थक रही है और किसान समुदाय पर हमला कर रही है।”

तीन विवादास्पद कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को नौ महीने पूरे हो गए। सरकार के साथ 10 दौर से अधिक की बातचीत भी दोनों पक्षों के बीच गतिरोध को तोड़ने में विफल रही है। सरकार इन कानूनों को प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में पेश कर रही है।