जब पाकिस्तान में खुल गई थी अजीत डोभाल की पोल, बाद में करवा ली प्लास्टिक सर्जरी

अजीत डोभाल सात साल पाकिस्तान में भारत के जासूस बनकर रहे। इस दौरान उन्होंने खुद को एक मुसलमान की तरह रखा और किसी को भी भनक नहीं लगने दी कि वे हिंदू हैं।

NDA, Ajit Doval, PM Modi, Pakistan

भारत सरकार के पांचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अजीत डोभाल देश के केंद्रीय शासन में बहुत ही शक्तिशाली शख्स माने जाते हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे पीएम मोदी के बेहद करीबी हैं। यह भी कहा जाता है कि वे कोई भी निर्णय बहुत सोच समझकर लेते हैं, लेकिन जो लेते हैं, उस पर अड़े रहते हैं।

अजीत डोभाल सात साल पाकिस्तान में भारत के जासूस बनकर रहे। इस दौरान उन्होंने खुद को एक मुसलमान की तरह रखा और किसी को भी भनक नहीं लगने दी कि वे हिंदू हैं। लेकिन एक बार ऐसी स्थिति आई जब पाकिस्तान में उनकी पोल खुल गई। उन्होंने बताया कि वे लाहौर के एक मुस्लिम इलाके में एक मुसलमान के रूप में रहा करते थे। लाहौर में ही एक बहुत बड़ी औलिया की मजार है, जहां बहुत लोग जाया करते हैं। एक बार वे वहां से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक बहुत ही आकर्षक व्यक्ति ने बुलाया। उसकी बहुत लंबी और सफेद दाढ़ी थी, जो देखने में मुसलमान लगता था।

डोभाल के मुताबिक वे उसके पास गए। उसने कहा कि तुम हिंदू हो। डोभाल ने कहा नहीं, मैं मुसलमान हूं। उसने कहा तुम झूठ बोल रहे हो, तुम हिंदू हो। डोभाल ने फिर इंकार किया। उसने कहा मैं जानता हूं कि तुुम हिंदू हो क्योंकि तुम्हारे कान छेदे हुए हैं। इस पर डोभाल ने उससे कहा कि मैं बाद में कन्वर्ट हुआ हूं। उस व्यक्ति ने कहा, नहीं तुम बाद में भी कन्वर्ट नहीं हुए हो। उसने बताया कि मैंने इतनी सूक्ष्म बातें कैसे जानीं, बताया कि मैं भी हिंदू हूं।

उसने डोभाल को सलाह दी कि वह प्लास्टिक सर्जरी करा लें, नहीं तो यहां दिक्कत हो जाएगी। डोभाल ने बाद में करा ली। हालांकि उनके कान में अब भी हल्का सा छेद दिखता है।

1945 में पौड़ी गढ़वाल के एक गढ़वाली परिवार में जन्म हुआ था। वे केरल कैडर के 1968 बैच के आईपीएस अफसर रहे हैं। वे आईबी समेत कई महत्वपूर्ण विभागों के मुखिया रहे हैं। वे 2005 में आईबी के डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे। भारत सरकार ने उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया था।

पाकिस्तान में एक अंडरकवर ऑपरेटिव के रूप में अजीत डोभाल ने खुफिया और आतंकवादी गतिविधियों की जानकारी एकत्र करने की बड़ी जिम्मेदारी निभाई। उनके निशाने पर माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम जैसे बड़े आतंकी नाम थे।