जब महाभारत, रामायण पर ऐंकर से भिड़ गए थे लालू यादव, कहा था- मैं बहुत बड़ा साधु हूं

भाषण के बाद वे जब उपस्थित जनों के सवालों के जवाब देने के लिए बैठे तो पहला सवाल एंकर ने ही कर लिया कि आप तो लोहिया और जेपी के साथ रहे हैं फिर ये अंधविश्वास की बातें क्यों? बात फंसती देख लालू पलट कर बोलेः हम गलत बात कौन कह रहे हैं …क्या लोहिया जी कृष्ण को नहीं मानते थे..

Lalu Yadav, RJD, Varanasi

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की भाषण कला का कोई सानी नहीं। संसद में भी जब वे अपने खास देसी अंदाज़ में जब व्यंग्य करना शुरू करते थे तो वह आदमी भी हंसते-हंसते लोट-पोट हो जाता था जिसको वे निशाने पर ले रहे होते थे।

एक ऐसी ही वाक्पटुता की मिसाल यूट्यूब में दर्ज है जब एक टीवी चैनल के वर्ष 2015 में हुए शिखर सम्मेलन में वे अपनी बात मनवाते-मनवाते कह बैठेः मैं बहुत बड़ा साधू हूं। हुआ यह कि लालू ने अपने संबोधन में मोदी सरकार की खूब आलोचना की। फिर, वे शुभ और अशुभ-मुहूर्त जैसी बातें करने लगे।

बोले, मोदी के शपथ लेते ही गोरखधाम एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। हिमाचल में कई छात्र बह गए। एक अस्पताल में इनक्यूबेटर के अंदर रखे नवजात बच्चे जल गए। फिर भूकंप भी आ गया। क्योंकि उन्होंने शपथ ग्रहण ही गदबेल वक्त यानी गोधूलि वेला में किया था। भला कौन पंडित शाम सवा छह बजे का यह मुहूर्त निकालेगा! यह गदबेल वह वक्त होता है जब माएं अपने बच्चों को सोने से मना करती हैं। ऐसे ही वक्त में जब न दिन होता है न रात होती है, भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया था। इतना कह कर लालू उपस्थित जनों को हंसाते हुए मुस्कराकर बोलेः हम कम साधू हैं क्या!

भाषण के बाद वे जब उपस्थित जनों के सवालों के जवाब देने के लिए बैठे तो पहला सवाल एंकर ने ही कर लिया कि आप तो लोहिया और जेपी के साथ रहे हैं फिर ये अंधविश्वास की बातें क्यों? बात फंसती देख लालू पलट कर बोलेः हम गलत बात कौन कह रहे हैं …क्या लोहिया जी कृष्ण को नहीं मानते थे…क्या महाभारत झूठ है..क्या कृष्ण झूठ है..क्या राम नहीं हैं..यह हमारा विश्वास है। लालू एंकर की कोई बात नहीं सुनते और भारतीय परंपराओं पर विश्वास जताते हुए मजमा जीत लेते हैं।