जब महेंद्र सिंह टिकैत ने प्रधानमंत्री से पूछ लिया था रिश्वत से जुड़ा सवाल, मुस्लिम युवती के लिए छेड़ दिया था आंदोलन

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत किसानों की लड़ाई लड़ने के साथ ही धर्मनिरपेक्षता के भी पक्षधर थे। उनके आंदोलन में गंगा जमुनी तहजीब झलकती थी।

हमेशा खड़ी बोली में बात करने वाले महेंद्र सिंह टिकैत किसी से भी सवाल पूछने से नहीं कतराते थे। एक बार तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव से भी रिश्वत से जुड़ा सवाल पूछ लिया था। (एक्सप्रेस आर्काइव)

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को 8 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके किसान नेता राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर पर इस आंदोलन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राकेश टिकैत लोकप्रिय किसान नेता रहे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं। महेंद्र सिंह टिकैत किसानों के हक़ के लिए प्रधानमंत्री से भी सवाल पूछने से नहीं कतराते थे। एक बार तो उन्होंने प्रधानमंत्री भी से रिश्वत से जुड़ा सवाल पूछ लिया था।

जब पीवी नरसिंह राव की सरकार केंद्र में चल रही थी तो उस दौरान हर्षद मेहता स्टॉक एक्सचेंज घोटाला हुआ था। इस घोटाले से राजनीतिक जगत में सनसनी मच गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह पर भी एक करोड़ रुपए का रिश्वत लेने का आरोप लगा था। इसके बाद नरसिंह राव पर भी कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे। उसी दौरान किसान नेता महेंद्र टिकैत उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह यादव सरकार के द्वारा किसानों को परेशान करने का मुद्दा लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव से मिलने पहुंचे।

हमेशा खड़ी बोली में बात करने वाले महेंद्र सिंह टिकैत ने मुलाक़ात के दौरान पीवी नरसिंह राव से सीधे पूछ लिया कि क्या आपने हर्षद मेहता से एक करोड़ रुपया लिया था। टिकैत के इस सवाल पर नरसिंह राव चौंक गए। टिकैत के सवाल पर नरसिंह राव ने भी उनसे पूछा कि क्या आप भी ऐसा ही सोचते हैं. नरसिंह राव और टिकैत के बीच अच्छी दोस्ती थी और दोनों के संबंध भी काफी मधुर थे। 

इतना ही नहीं मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने मन में उपज रहे सारे सवाल पूछ लिए। टिकैत ने मुलाक़ात के दौरान हर्षद मेहता का नाम लेकर कहा कि वो तो पांच हजार करोड़ का घोटाला करके बैठा है, कई मंत्री भी घोटाले में लिप्त हैं। लेकिन सरकार उनसे वसूली करने के बजाय किसानों को सिर्फ 200 रुपए के लिए जेल भेज रही है। महेंद्र सिंह टिकैत किसानों के हक़ के लिए किसी के सामने भी आवाज उठाने से नहीं चूकते थे। 

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत किसानों की लड़ाई लड़ने के साथ ही धर्मनिरपेक्षता के भी पक्षधर थे। उनके आंदोलन में गंगा जमुनी तहजीब झलकती थी। एक बार तो महेंद्र टिकैत ने एक मुस्लिम युवती को न्याय दिलाने के लिए भी आंदोलन कर दिया था। दरअसल ढाई दशक पहले मुजफ्फरनगर के सीकरी गांव की रहने वाली नईमा नाम की मुस्लिम युवती का अपहरण हो गया। जब कई दिन बाद भी उसका पता नहीं चला तो परिजन महेंद्र सिंह टिकैत के पास पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई।

जिसके बाद टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सैकड़ों किसान भोपा नहर पर धरने पर बैठ गए। फिर स्थानीय प्रशासन से लेकर सीएम तक ने उनसे बात की। नईमा की तलाश में कई टीमें लगा दी गई। बाद में नईमा की लाश बरामद हुई थी। महेंद्र सिंह टिकैत अपने आंदोलनों में हिंदू और मुस्लिम किसानों को साथ लेकर साथ चलते थे। इतना ही नहीं किसान नेता गुलाम जौला ने भी करीब 27 साल तक महेंद्र सिंह टिकैत के साथ काम किया था। जौला के कहने पर कई मुसलमान किसान आंदोलन से जुड़े थे।