जब रवि किशन को कहा गया ‘सस्ता मिथुन चक्रवर्ती’, फिल्में देने से किया गया इंकार; ऐसे मिली थी पहली पिक्चर

रवि किशन जब निर्माताओं से काम मांगने जाते तो उन्हें यह कहा जाता कि वो मिथुन चक्रवर्ती की सस्ती कॉपी लगते हैं और काम देने से इंकार कर दिया जाता। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई आकर उन्हें अपना नाम भी बदलना पड़ा।

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भोजपुरी स्टार और बीजेपी सांसद रवि किशन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने हिंदी फिल्म जगत में भी कई फिल्मों में काम किया है और भोजपुरी सिनेमा जगत में तो उन्हें भोजपुरी का अमिताभ बच्चन माना जाता है। रवि किशन ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है। जब वो उत्तर प्रदेश, जौनपुर के अपने घर से भागकर मुंबई आए तब उनके पास न रहने के लिए घर था न कोई जानने वाला। बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन रवि किशन ने मुंबई आकर प्रोडक्शन हाउस के चक्कर लगाने शुरू कर दिए।

रवि किशन को मुंबई में कई सालों तक संघर्ष करना पड़ा और इसी बीच उन्हें अपना नाम भी बदलना पड़ा। उन्हें अपने नाम से शुक्ला हटाकर किशन लगाना पड़ा। इस बारे में बोलते हुए एक इंटरव्यू के दौरान रवि किशन ने आज तक से कहा था कि यूपी बिहार के लोगों को मुंबई वाले ठेला वाला, दूध वाला समझते थे।

उन्होंने बताया, ‘सिनेमा में अलग नजर से देखा जाता था। भैया, दूध वाला, ठेला वाला समझा जाता था। भोजपुरी हिंदी के लोगों को नीचा समझा जाता था। एक लड़ाई में बोला गया कि शुक्ला तो हटाना पड़ेगा। मेरे पास पैसे नहीं थे। अपने पिता का नाम हटाना इससे दुखद क्या होगा। रोजी रोटी के लिए ऐसा करना पड़ा।’ रवि किशन ने यह भी बताया कि काम के सिलसिले में वो मुंबई की सड़कों पर पैदल ही घूमे हैं।

वहीं रवि किशन जब निर्माताओं से काम मांगने जाते तो उन्हें यह कहा जाता कि वो मिथुन चक्रवर्ती की सस्ती कॉपी लगते हैं और काम देने से इंकार कर दिया जाता। रवि किशन से कहा गया कि उनकी शक्ल मिथुन चक्रवर्ती से मिलती है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहले से ही एक मिथुन चक्रवर्ती है तो उन्हें सस्ती कॉपी की जरूरत नहीं।

इसके बाद कई सालों तक रवि किशन को इसी वजह से फिल्में नहीं मिली। रवि किशन को काफी मशक्कत के बाद फिल्म पीतांबर में एक छोटा सा रोल मिला लेकिन यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही थी। साल 1994 में आई फिल्म उधार की जिंदगी में रवि किशन ने जितेंद्र और काजोल जैसे बड़े दिग्गजों के साथ काम किया। लेकिन इस फिल्म से जुड़ी उनकी कड़वी यादें भी हैं।

इस फिल्म में काम करने के लिए रवि किशन को जितने पैसे देने का वादा किया गया था, फिल्म के बाद वो पैसे रवि किशन को नहीं मिले जिसका उन्हें बहुत बुरा लगा था और वो रोते हुए घर आए थे।

रवि किशन ने इसके बाद टीवी इंडस्ट्री का रुख किया और हैलो इंस्पेक्टर जैसे शोज़ में काम किया। इसके बाद उन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री से भी ऑफर आने लगे। जब उन्होंने भोजपुरी में फिल्में करनी शुरू की तब जैसे उनकी किस्मत खुल गई। दर्शकों ने उन्हें भरपूर प्यार दिया। बैरी कंगना, सनकी दरोगा, गंगा, जनम जनम के साथ आदि उनकी कुछ लोकप्रिय भोजपुरी फिल्में हैं।