जब रामदेव से पत्रकार ने पूछा था रामलीला मैदान पर सवाल, जवाब दिया- एक बार संकट आना ज़रूरी

योग गुरु ने कहा था, ” न मैं राजजादा हूं, न मैं शहजादा हूं और न हरामजादा हूं। मैंने जीवन में एक-एक पग चुनौतियों के बीच आकर धरा हूं। जितनी चुनौतियां है। जितने भी हमारे जीवन में संकट आते हैं, वे और ताकतवर बनाते हैं, और मैं तो चाहता हूं कि संकट सबके जीवन में एक बार गहरे आने ही चाहिए।”

योग गुरु बाबा रामदेव (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस By Prem Nath pandey)

योग गुरु बाबा रामदेव हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। अभी हाल ही में कोविड संकट के दौरान एलोपैथी चिकित्सा और डॉक्टरों के बारे में बयान देकर देशभर में तूफान मचा दिए थे और डॉक्टरों की संस्था आईएमए समेत तमाम अन्य लोगों के विरोध का सामना किया। पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में नोटबंदी और कैशलेश व्यवस्था को लेकर एबीपी न्यूज चैनल पर कुछ वर्ष पहले हुए एक कॉनक्लेव में भी उन्होंने बड़े जोरदार और तीखे बयान देकर चर्चा में आए थे।

कॉनक्लेव में एंकरिंग कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने उनसे पूछा था कि वह लम्हा जब बाबा रामदेव रामलीला मैदान में घिरे हुए महसूस कर रहे थे और आज जब एक सफल उद्यमी है तो इसे कैसे देखते हैं तो उन्होंने कहा, “चुनौतियां, संघर्ष, संकट, कष्ट, समस्याएं, अंधेरे, झंझावात इनको बचपन से देखा। मैं किसी रईश घराने, राजघराने में नहीं पैदा हुआ। न मैं राजजादा हूं, न मैं शहजादा हूं और न हरामजादा हूं। मैंने जीवन में एक-एक पग चुनौतियों के बीच आकर धरा हूं। जितनी चुनौतियां है। जितने भी हमारे जीवन में संकट आते हैं, वे और ताकतवर बनाते हैं, और मैं तो चाहता हूं कि संकट सबके जीवन में एक बार गहरे आने ही चाहिए।”

उन्होंने कहा, “यदि महात्मा गांधी को ट्रेन से बाहर न फेंका गया होता तो वह मोहन दास करमचंद गांधी रह जाते, महात्मा गांधी न बन पाते। चाहे हमारे शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु हों, चाहे छत्रपति शिवाजी महाराज हों या महाराणा प्रताप हों, या मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हों या योगेश्वर श्रीकृष्ण ही हों, सबने विकट से विकट संकट देखे। और जिसने संकट देखे, वही दुनिया में विजेता बना है। मैं तो चाहता हूं कि एक बार सबके जीवन में संकट आने ही चाहिए। और आपकी लाइफ में न आया हो तो मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि आपके जीवन में भी आना चाहिए।”

बाबा रामदेव ने कहा था कि नोटबंदी गलत फैसला नहीं था, लेकिन उसके साथ उसके चारों और जो और कुछ होने की जरूरत थी, वह नहीं हुई, इसीलिए उसका पूरा फायदा नहीं मिल सका। कहा सरकार ने दृढ़ता से इसका पालन किया, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

कॉनक्लेव में बाबा रामदेव बोले कि जितना पैसा दवाओं में खर्च हो रहा है, उतना पैसा रिसर्च में लगा दीजिए तो लोगों के स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति आ जाए। नई-नई चीजें निकलेंगी और नई तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी। हालांकि इसके लिए पूरी तरह से धैर्य रखना होगा।