जब शूटिंग के दौरान नदी में डूबने लगीं सुरैया, देव आनंद ने बचाने के लिए लगा दी थी जान; इतने हजार की अंगूठी से किया था प्रपोज

देव आनंद को सुरैया से प्यार का एहसास तब हुआ जब सुरैया नदी में डूबने लगी थीं और उन्हें बचाने के लिए वो नदी में कूद पड़े थे। देव आनंद ने उन्हें बचा लिया और नदी से बाहर निकलते ही एक अंगूठी देकर अपने प्यार का इजहार भी कर दिया।

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अपने जमाने के बेहतरीन अभिनेता रहे देव आनंद और अभिनेत्री सुरैया की प्रेम कहानी बड़ी दिलचस्प है। देव आनंद ने जब फिल्मों में काम करना शुरू किया तब उन्हें रोमांटिक रोल ही मिलते थे और उनकी इमेज भी एक रोमांटिक हीरो की बन गई थी। वहीं सुरैया एक सफल अभिनेत्री थीं। शुरु में सुरैया के साथ काम करने में देव आनंद को थोड़ा बुरा लगता था क्योंकि फिल्म के क्रेडिट में उनका नाम सुरैया के नाम के बाद आता था। लेकिन धीरे- धीरे उन्हें सुरैया से प्यार हो गया।

देव आनंद को सुरैया से प्यार का एहसास तब हुआ जब एक बार सुरैया नदी में डूबने लगी थीं और उन्हें बचाने के लिए बिना कुछ सोचे देव आनंद नदी में कूद पड़े थे। फिल्म विद्या के एक गाने की शूटिंग चल रही थी। ‘किनारे किनारे चले हम’ गाने की शूटिंग नदी के बीच हो रही थी। सुरैया और देव आनंद नाव पर बैठे थे और गाना फिल्माया जा रहा था।

तभी अचानक नव पलट गई और सुरैया डूबने लगीं। उन्हें डूबता देख देव आनंद ने बिना अपने जान की परवाह किए नदी में छलांग लगा दी। देव आनंद ने उन्हें बचा लिया और नदी से बाहर निकलते ही सुरैया से अपने प्यार का इजहार भी कर दिया। देव आनंद ने 3 हज़ार की कीमती अंगूठी देकर सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया था। सुरैया भी देव आनंद को पसंद करती थीं, वो ना नहीं कर सकीं।

लेकिन दोनों का प्यार परवान नहीं चढ़ सका क्योंकि सुरैया के परिवार वाले इस शादी के खिलाफ थे। इसके बाद देव आनंद बिल्कुल टूट गए थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘सुरैया मेरा पहला प्यार थीं और उनके लिए मैं रोया हूं। अगर देव आनंद किसी लड़की के लिए रोया है तो वो बहुत बड़ी स्टार थीं। वो गाड़ियों में जाती थीं और मैं ट्रेनों में जाता था और पैदल चलते- चलते उसके दरवाजे खटखटाता था और उसके साथ जाकर बैठ जाता था।’

सुरैया से अलग होने के बाद देव आनंद अपने बड़े भाई चेतन आनंद के कंधे पर सिर रखकर रोते थे। उन्होंने बताया था, ‘मैं तब इतना उदास हो गया था कि मेरी आंखों में आंसू थे। मैं उस वक्त अपने बड़े भाई चेतन के कंधे पर रोया। उन्होंने मुझे दिलासा दिया। फिर इसके बाद जो देव आनंद का कैरेक्टर है, ‘मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया’ तो सोचा अगर वो तब नहीं निकलती तो ये देव आनंद नहीं होता आपके सामने।’