‘जमानत’ में अमिताभ बच्चन ने पहना था इतना महंगा चश्मा, इनकम टैक्स की टीम पड़ गई थी पीछे

फिल्म जमानत में अमिताभ बच्चन ने रे-बन के सनग्लासेस पहने थे। उस चश्मे की कीमत 2 लाख 70 हज़ार बताई गई। इस खबर पर इनकम टैक्स अधिकारी उनसे सवाल पूछने लगे कि उन्होंने इतनी महंगी खरीद कैसे की।

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बच्चन परिवार और गांधी परिवार के बीच कभी बेहद करीबी रिश्ता हुआ करता था। यह दोस्ती अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन के जमाने से शुरू हुई थी। अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी में भी गहरी दोस्ती थी और उन्हीं के कहने पर अमिताभ बच्चन ने कांग्रेस के टिकट से चुनाव भी लड़ा। लेकिन बाद के वर्षों में दोनों परिवारों के बीच दूरियां बढ़ीं और अमिताभ बच्चन समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह के करीब होते चले गए। दोनों परिवारों के बीच बढ़ी तल्खी के बाद 2005 में यूपीए शासनकाल में अमिताभ बच्चन को इनकम टैक्स विभाग की ओर से 4.5 करोड़ रुपए का नोटिस भेजा गया।

जून 2006 में फिर से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अमिताभ बच्चन के पीछे पड़ गया। और इस बार वजह था एक कीमती चश्मा। दरअसल फिल्म जमानत में अमिताभ बच्चन ने रे-बन के सनग्लासेस पहने थे। उस चश्मे की कीमत 2 लाख 70 हज़ार बताई गई। अमिताभ ने  फिल्म में एक अंधे वकील का रोल किया था जो यही चश्मा लगाए रहता था।

अमिताभ ने वो चश्मा फिल्म खत्म होने के बाद अपने दोस्त और फिल्म के डायरेक्टर एस रामनाथन को दे दिया। इस खबर से इनकम टैक्स के कान खड़े हो गए। इनकम टैक्स अधिकारी चाहते थे कि अमिताभ बताएं उन्होंने इतनी महंगी खरीद कैसे की। पार्टी के शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक़, अमिताभ बच्चन को मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह से नजदीकी के कारण परेशान किया जा रहा था।

इस बात से समाजवादी पार्टी बेहद नाराज़ हुई और उसके कार्यकर्ताओं और अमिताभ बच्चन के फैंस ने उत्तर प्रदेश और मुंबई में इनकम टैक्स कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अमिताभ बच्चन को 2005 में आयकर विभाग की तरफ से 4.5 करोड़ रुपए का नोटिस भेजा गया तब वो आंत की बीमारी से जूझ रहे थे और लीलावती अस्पताल में भर्ती थे। इस हालत में भी उन्होंने बेड पर लेटे- लेटे ही अपने हाथों से बिल भरा था।

अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल (अमिताभ बच्चन कंपनी लिमिटेड) पर भी इनकम टैक्स की नजर पड़ी थी। साल 2006 में इनकम टैक्स ने कंपनी के टैक्स का पूरा ब्यौरा मांगा था।

साल 2007 में तो अमिताभ बच्चन और गांधी परिवार के बीच इतनी दूरियां बढ़ गईं कि जब तेजी बच्चन का निधन हुआ तब उनके अंतिम संस्कार में गांधी परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ। दोनों परिवारों के बीच लगभग 6 दशक तक दोस्ती रही थी।