जम्मू पहुंचे गुलाम नबी, पर नहीं दी पार्टी की J&K यूनिट को खबर, ‘G-23’ गुट के नेता भी पहुंचे; बोले- आजाद से हुआ दुर्व्यवहार

बताया गया है कि जम्मू में एक एनजीओ के लिए होने वाले कार्यक्रम में गुलाम नबी आजाद के साथ जी-23 से जुड़े नेताओं को न्योता दिया गया, लेकिन स्थानीय पदाधिकारियों को नहीं बुलाया गया।

Congress, Ghulam Nabi Azad

कांग्रेस में आंतरिक कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही। कुछ ही दिनों पहले राज्यसभा में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले गुलाम नबी आजाद शुक्रवार को जब जम्मू-कश्मीर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे, तो उनके साथ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की मांग करने वाले करीब 23 पूर्व नेता भी साथ ही इकट्ठा हुए। कहा गया कि सभी नेता एक एनजीओ से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे, लेकिन एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के बयान ने एक बार फिर पार्टी में मतभेदों को उजागर कर दिया।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से लिखा कि पार्टी के वरिष्ठ चेहरे इस जमावड़े के जरिए राहुल गांधी को संदेश देना चाहते हैं। पार्टी नेता ने कहा कि हम उन्हें बताना चाहते हैं कि उत्तर से लेकर दक्षिण तक भारत एक है। ऐसे में कश्मीर में कांग्रेस के विद्रोही नेताओं के साथ जुटने की घटना पार्टी में उभर रहे तनाव की ओर इशारा कर रही है।

बता दें कि गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में कार्यकाल पूरा होने के बाद ही जम्मू-कश्मीर दौरे की योजना बनाई। उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई को इसकी जानकारी नहीं दी थी। हालांकि, बाद में केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद शुक्रवार को जम्मू स्थित पार्टी ऑफिस में आजाद के लिए रिसेप्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान आजाद से अपील की गई कि वे रिसेप्शन में पहुंचें, ताकि स्थानीय नेताओं को गलत संदेश न जाए।

कौन-कौन पहुंचा गुलाम नबी आजाद के साथ जम्मू?: बताया गया है कि कांग्रेस के इन नेताओं के जम्मू पहुंचने का कारण एक एनजीओ- गांधी ग्लोबल फैमिली फाउंडेशन की ओर से मिला न्योता था। यह प्रोग्राम शनिवार को होना है। जो नेता आजाद के साथ कार्यक्रम के लिए पहुंचे हैं, उनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, राज्यसभा में पार्टी के उपनेता आनंद शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी, उत्तर प्रदेश के पूर्व कांग्रेस प्रमुख राज बब्बरऔर पार्टी के कानूनी और मानवाधिकार सेल के प्रमुख विवेक तन्खा शामिल रहे।

जानकारी के मुताबिक, गांधी इंस्टीट्यूट के लिए होने वाले कार्यक्रम में जी-23 से जुड़े नेताओं को न्योता दिया गया, लेकिन स्थानीय पदाधिकारियों को नहीं बुलाया गया। इसे लेकर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व खुश नहीं है। यहां तक कि पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

आजाद के साथ खराब बर्ताव का मुद्दा उठा: द टेलिग्राफ अखबार के मुताबिक, जब कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से पूछा गया कि क्या यह पार्टी नेतृत्व के लिए चेतावनी की तरह देखा जाए, तो उन्होंने कहा, “किस तरह की चेतावनी, हम सब कांग्रेस में हैं और हमारा लक्ष्य और सभी कोशिशें कांग्रेस को मजबूत करने के लिए हैं। हम राजनीति से सिर्फ इसलिए रिटायर नहीं होंगे, क्योंकि कुछ नेता ऐसा चाहते हैं।”

एक अन्य नेता ने कहा, “गुलाम नबी आजाद के साथ खराब बर्ताव हुआ। सोनिया गांधी के साथ दिसंबर में जो समझौता हुआ था, उसका उल्लंघन किया गया। हम अपनी चोट लगने की भावना को छिपाते नहीं हैं।” बता दें कि इससे पहले जी-23 ग्रुप के ही एक नेता ने कहा था कि कांग्रेस में फैसले निजी पसंद और नापंसद जाहिर कर के नहीं लिए जा सकते। पार्टी सबकी है और हम सबने इंदिरा गांधी के समय से इसे अपने खून से सींचा है।