जातीय जनगणना पर केंद्र की न, लालू बिफरे- पिछड़ों से BJP-RSS को नफरत क्यों? मायावती बोलीं- कथनी-करनी का अंतर बेनकाब

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि, सरकार जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं है। और यह फैसला काफी सोच समझकर लिया गया है।

Lalu Prasad Yadav ,BSP, RJD, Mayawati मायावती और लालू प्रसाद यादव(फोटो सोर्स: एक्सप्रेस फोटो)

देश की सर्वोच्च अदालत में केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दायर कर कहा है कि वह जातिगत जनगणना नहीं कराएगी। इस मुद्दे पर मोदी सरकार के रूख को देख अब तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि, केंद्र सरकार की कथनी और करनी में अंतर सामने आ गया है।

उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि, “केन्द्र सरकार द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके पिछड़े वर्गों की जातीय जनगणना कराने से साफ तौर पर इन्कार कर देना यह अति-गंभीर व अति-चिन्तनीय, जो भाजपा के चुनावी स्वार्थ की ओबीसी राजनीति का पर्दाफाश व इनकी कथनी व करनी में अन्तर को उजागर करता है। सजगता जरूरी।”

एक और ट्वीट में मायावती ने लिखा- “एससी व एसटी की तरह ही ओबीसी वर्ग की भी जातीय जनगणना कराने की माँग पूरे देश में काफी जोर पकड़ चुकी है, लेकिन केन्द्र का इससे साफ इन्कार पूरे समाज को उसी प्रकार से दुःखी व इनके भविष्य को आघात पहुँचाने वाला है जैसे नौकरियों में इनके बैकलॉग को न भरने से लगातार हो रहा है।”

वहीं मोदी सरकार के इस फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट में लिखा- ‘जनगणना में सांप-बिच्छू, तोता-मैना, हाथी-घोड़ा, कुत्ता-बिल्ली, सुअर-सियार सहित सभी पशु-पक्षी पेड़-पौधे गिने जाएंगे, लेकिन पिछड़े- अतिपिछड़े वर्गों के इंसानों की गिनती नहीं होगी। वाह! BJP-RSS को पिछड़ों / अति पिछड़ों से इतनी नफरत क्यों? जातीय जनगणना से सभी वर्गों का भला होगा। इससे सबकी वास्तविक स्थिति का पता चलेगा।’

उन्होंने BJP-RSS के बहिष्कार की बात करते हुए लिखा कि, “BJP-RSS पिछड़ा/अतिपिछड़ा वर्ग के साथ बहुत बड़ा छल कर रहा है। अगर केंद्र सरकार जनगणना फ़ॉर्म में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर देश की कुल आबादी के 60 फ़ीसदी से अधिक लोगों की जातीय गणना नहीं कर सकती तो ऐसी सरकार और इन वर्गों के चुने गए सांसदों व मंत्रियों पर धिक्कार है। इनका बहिष्कार हो।”

वहीं सर्वोच्च न्यायालय में दायर किए अपने हलफनामें में सरकार ने कहा कि, जातिगत जनगणना नहीं होगी, और यह फैसला काफी सोच समझकर लिया गया है। केन्द्र सरकार ने कहा है कि 2021 में जाति जनगणना नहीं की जा सकती है। जनगणना में एससी और एसटी जातियों की जनगणना पहले से होती आ रही है, और वह इस बार भी होगी। लेकिन इसके अलावा किसी दूसरी जाति की गणना इस बार नहीं होगी।