जानें कौन थे राजीव गांधी के करीबी सतीश शर्मा, जिनकी अर्थी को राहुल गांधी ने नंगे पैर दिया कंधा, कभी SC ने कहा था- राजाओं की तरह करते हैं बर्ताव

कैप्टन सतीश शर्मा ने 2004 में रायबरेली सीट सोनिया गांधी के लिए छोड़ दी थी, इसके बाद ही राहुल गांधी अमेठी सीट से चुनाव लड़ा था।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजीव गांधी के करीबी दोस्तों में शामिल रहे कैप्टन सतीश शर्मा के पार्थिव शरीर को कंधा दिया। राहुल पार्टी के अन्य नेताओं के साथ उनके अंतिम संस्कार में पहुंचे। यहां उन्होंने नंगे पैर ही शर्मा की अर्थी को कंधा दिया। बता दें कि कैप्टन सतीश शर्मा का बुधवार को गोवा में निधन हुआ था। वे 73 साल के थे। शर्मा कैंसर से पीड़ित थे और पिछले कुछ समय से बीमार थे। उनका शव दिल्ली लाया गया। अंतिम संस्कार यहां लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में हुआ। इस मौके पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा , प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा और कांग्रेस के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में 11 अक्टूबर, 1947 को जन्मे शर्मा एक पेशेवर वाणिज्यिक पायलट थे। वह तीन बार राज्यसभा सदस्य भी बने और उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। वह पहली बार जून 1986 में राज्यसभा सदस्य बने और बाद में राजीव गांधी के निधन के बाद 1991 में अमेठी से लोकसभा सदस्य चुने गए।

रायबरेली और अमेठी निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके शर्मा तीन बार लोकसभा सदस्य चुने गए। 1999 में सोनिया गांधी के अमेठी से लड़ने के बाद शर्मा ने रायबरेली से चुनाव लड़ा था। बाद में 2004 में फिर उन्होंने सोनिया गांधी के लिए रायबरेली सीट छोड़ी और राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव लड़ने का रास्ता साफ किया। इसके बाद वह जुलाई 2004 से 2016 तक राज्यसभा सदस्य रहे। शर्मा के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा एवं एक बेटी है।

विवादों से रहा नाता: सतीश शर्मा अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही विवादों में घिरे रहे। राजीव गांधी के कार्यकाल में उनका नाम कुछ विवादित जमीन सौदों से जुड़ा रहा। पीवी नरसिम्हा राव के पीएम रहने के दौरान पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय संभाल रहे शर्मा का नाम फिर विवाद से जुड़ा था। उन पर मनमाने तरीके से पेट्रोल पंप डीलरशिप और गैस एजेंसी आवंटित करने के आरोप लगे थे। 1997 में सुप्रीम कोर्ट शर्मा द्वारा आवंटित किए गए पेट्रोल पंपों का आवंटन रद्द कर दिया था। साथ ही इसके लिए उन पर 50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। बाद में कोर्ट ने इस जुर्माने को हटाया था।