जान गंवाने वाले साथियों के मुआवजे पर अड़े किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी, राकेश टिकैत बोले- सरकार से समझौते में हो यह बात; उभरे मतभेद

बीकेयू लीडर राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि दिल्ली सीमा पर चल रहे आंदोलन को हरियाणा सरकार अपने यहां शिफ्ट करना चाहती है। बोले ऐसा किसी कीमत पर नहीं होने देंगे।

BKU Leader, Farmer leader बीकेयू नेता राकेश टिकैत (बाएं) और किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी (दाएं)। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत और किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी के बीच फिर मतभेद उभर गए हैं। दोनों नेताओं ने हाल के आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले साथियों और घायलों के मुआवजे पर अलग-अलग राय दी है। राकेश टिकैत ने कहा है कि बसताड़ा लाठीचार्ज में जिन साथियों और किसानों की मौत हुई है, उसको लेकर भारत सरकार से पहले समझौता होगा। उसी में मुआवजे की बात तय होगी। दूसरी तरफ किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी ने साफ किया है कि सरकार इस हफ्ते मुआवजे का ऐलान नहीं करती है तो छह सितंबर के बाद करनाल जिला सचिवालय का बेमियादी घेराव किया जाएगा।

दोनों नेता अपनी-अपनी राय पर अड़े हैं। राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि आंदोलन की रूपरेखा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सीमा पर चल रहे आंदोलन को हरियाणा सरकार अपने यहां शिफ्ट करना चाहती है। बोले ऐसा किसी कीमत पर नहीं होने देंगे।

इससे पहले सोमवार को हुई घरौंडा महापंचायत में किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी ने स्पष्ट तौर पर मुआवजे की मांग उठाते हुए ऐलान किया था कि मुआवजे के बारे में नहीं बोला गया तो छह सितंबर के बाद करनाल में जिला सचिवालय का बेमियादी घेराव किया जाएगा। खास बात यह है कि टिकैत ने दोनों ही बातों को एक तरह से खारिज कर दिया।

उधर, हरियाणा के सिरसा की एक सभा में किसान नेता राकेश टिकैत ने बीजेपी को सबसे खतरनाक पार्टी बताते हुए इससे बचने की सलाह दी। उन्होंने यहां तक कहा कि यूपी के चुनाव में जीत हासिल करने के लिए यह पार्टी हिंदू-सिख या हिंदू-मुसलमान को लड़ाएगी। इसके लिए पार्टी चुनाव से पहले किसी बड़े हिंदू नेता की हत्या कराएगी।

इस देश पर ‘सरकारी तालिबानियों’ का कब्जा हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस SDM ने किसानों पर लाठियां चलवाईं उसका चाचा RSS में बड़े ओहदे पर है। इन सरकारी तालिबानियों का पहला कमांडर करनाल में मिल चुका है. अगर ये हमें खालिस्तानी कहेंगे तो हम इनको तालिबानी कहेंगे।

आरोप लगाया कि सरकार बड़ी कंपनियों को पहले कर्ज देती है फिर माफ कर देती है। वहीं किसानों को सरकार कर्ज देती है और किसी वजह से नहीं चुका पाने पर उनकी जमीन, खेत नीलाम कर देती है।