जो कन्हैया अपनी सीट नहीं बचा पाया, वह कांग्रेस बचाएगा? चीख-चीखकर पूछने लगे अमिश देवगन, कांग्रेस नेता बोलीं- काहे छटपटा रहे हैं

अमिश देवगन का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें सवाल करते दिखे कि अपनी सीट न बचा पाने वाला कन्हैया कांग्रेस को बचा पाएगा?

Congress, Congress president कांग्रेस लीडर कन्हैया कुमार (फोटो सोर्स – पीटीआई)

गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और कन्हैया कुमार ने कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन कर ली है। दोनों ने राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थामा है। वहीं दूसरी ओर नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे लेकर पार्टी लोगों के निशाने पर भी आ गई है। इस मामले को लेकर अब मशहूर पत्रकार अमिश देवगन का वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह चीख-चीखकर यह पूछते नजर आए कि क्या वह कन्हैया कुमार कांग्रेस को बचा पाएगा, जो अपनी सीट तक नहीं बचा पाया था।

अमिश देवगन ने कांग्रेस के बारे में बात करते हुए कहा, “कपिल सिब्बल कांग्रेस पार्टी के दफ्तर में बैठकर उन्हीं की फजीहत करते हैं और कोई कुछ बोल नहीं पाता है। इस देश की सबसे पुरानी पार्टी को दीमक लग गया है क्या? वो कहते हैं कि कांग्रेस डूबता हुआ जहाज है, गांधी परिवार कांग्रेस को डूबने से नहीं बचा पाया।”

अमिश देवगन ने अपने बयान में कन्हैया कुमार का जिक्र करते हुए कहा, “कन्हैया कुमार कांग्रेस को बचाएगा, जो अपनी सीट नहीं बचा पाया और कितने वोटों से हार गया। कांग्रेस पार्टी के इतने कार्यकर्ता, वरिष्ठ नेता कांग्रेस को नहीं बचा सकते हैं, छात्र संघ के नेता कांग्रेस को नहीं बचा सकते, कन्हैया कुमार बचाएगा? एक-एक कार्यकर्ता के दिल में घुसकर पूछिए कि क्या कांग्रेस को कन्हैया कुमार की आवश्यता है।”

अमिश देवगन ने अपने बयान में नवजोत सिंह सिद्धू का भी जिक्र किया और कहा, “क्या कांग्रेस पार्टी को नवजोत सिंह सिद्धू की आवश्यकता है, जो पार्टी को बीच मजधार में छोड़कर चले गए। मैं बहुत ही हल्का शब्द बोल रहा हूं, लेकिन असल में वह कांग्रेस के लिए पंजाब में उथल-पुथल करके गए हैं।”

अमिश देवगन के इस वीडियो को लेकर अब पत्रकार व राजनैतिक दिग्गज भी खूब ट्वीट कर रहे हैं। कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने वीडियो को शेयर करते हुए अमिश देवगन से सवाल किया, “ये पिट्ठू भाई इतना काहे छटपटा रहे हैं?”

वहीं पत्रकार रोहिणी सिंह ने सवाल करते हुए लिखा, “सीट तो अपनी जेटली जी भी हार गए थे, क्या भाजपा ने उन्हें मंत्री नहीं बनाया? सीट तो सिंधिया अपने कर्मचारी से हार गए, तो क्या वे मंत्री नहीं बने? अनेकों बार हारने वाले जितिन प्रसाद को लक्ष्मीाकांत वाजपेयी जैसों को दरकिनार कर मंत्री नहीं बनाया गया? कभी ये सवाल पूछते देखा आपने इन्हें?”