‘टीम इंडिया चिंतित थी कि कहीं सिराज कुछ गलत ना कर लें’, भारतीय पेसर को लेकर सामने आई यह बात

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज की कहानी कई अलग-अलग भावनाओं से भरी हुई है। इसमें त्रासदी का दुख, अपने कौशल में पारंगत होने का रोमांच और शीर्ष स्तर पर सफलता की खुशी सबकुछ शामिल है।

mohammad-siraj-was-in-depression-and-alone-during-quarantine-in-australia-after-death-of-his-father-and-team-india-was-worried ‘टीम इंडिया चिंतित थी कि कहीं सिराज कुछ गलत ना कर लें’, भारतीय पेसर को लेकर सामने आई यह बात (Source: twitter)

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में धमाल मचाने के बाद भारतीय पेसर मोहम्मद सिराज ने। इंग्लैंड के बल्लेबाजों को भी परेशान कर रखा है। लॉर्ड्स टेस्ट में 8 विकेट लेकर सिराज ने मेजबान टीम की कमर तोड़ दी। लेकिन क्या आपको पता है कि सफलता के इस पथ पर आने से पहले सिराज को जिंदगी के कई मुश्किल इम्तिहानों से गुजरना पड़ा है। उसमें से ही एक है उनके पिता का निधन जब वे टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने से कुछ क्षण दूर

ऑस्ट्रेलिया में क्वारंटीन में थे।दरअसल इस भारतीय तेज गेंदबाज की कहानी कई अलग-अलग भावनाओं से भरी हुई है। इसमें त्रासदी का दुख, अपने कौशल में पारंगत होने का रोमांच और शीर्ष स्तर पर सफलता की खुशी सबकुछ शामिल है।

इंग्लैंड के खिलाफ लार्ड्स में हाल में संपन्न दूसरे टेस्ट में भारत की जीत के दौरान आठ विकेट चटकाकर सिराज ने दिखा दिया है कि आस्ट्रेलिया में उनकी सफलता तुक्का नहीं थी और वह लंबी रेस के घोड़े हैं।

सिराज जुनून और गौरव की कई कहानियों में से एक हैं जिसका जिक्र भारतीय क्रिकेट पर नई किताब ‘मिशन डॉमिनेशन: एन अनफिनिश्ड क्वेस्ट’ में किया गया है। इसके लेखक बोरिया मजूमदार और कुशान सरकार हैं जबकि इसे साइमन एंड शुस्टर ने प्रकाशित किया है।

भारतीय टीम को हमेशा से पता था कि सिराज के अंदर सफलता हासिल करने का जज्बा है क्योंकि उन्होंने उसे आस्ट्रेलिया दौरे के दौरान देखा था जब संक्षिप्त बीमारी के बाद उनके पिता का निधन हो गया था।

सिराज बेहत दुखी और अकेले थे

किताब के अनुसार, ‘‘नवंबर में आस्ट्रेलिया में 14 दिन के अनिवार्य क्वारंटीन के दौरान सिराज के पिता का इंतकाल हो गया था। इसका मतलब था कि टीम का कोई भी साथी इस दौरान गम को साझा करने के लिए उनके कमरे में नहीं जा सकता था। उस समय सभी के कमरों के बाहर पुलिसकर्मी खड़े थे जिससे कि भारतीय नियमों का उल्लंघन नहीं करें। उनकी निगरानी ऐसे हो रही थी जैसे वे मुजरिम हैं।’’

इस किताब में ये बताया गया है कि, ‘‘इसका नतीजा यह था कि टीम के साथी पूरे दिन सिराज के साथ वीडियो कॉल पर बात करते थे। वे चिंतित थे कि कहीं वह कुछ गलत ना कर लें या खुद को नुकसान ना पहुंचा ले। सिर्फ फीजियो उपचार के लिए उनके कमरे में जा सकते थे। फीजियो नितिन पटेल ने अंदर जाकर इस युवा खिलाड़ी का गम भी साझा किया था।’’

कभी हार नहीं मानी

किताब के अनुसार, ‘‘सिराज कई मौकों पर टूट गए जो स्वाभाविक था लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वह भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की अपने पिता की इच्छा पूरी करना चाहते थे और जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर बॉक्सिंग डे टेस्ट के दौरान मौका मिला तो वह उसे हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे। ’’

गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट श्रृंखला में 13 विकेट चटकाकर सिराज रातों रात स्टार बन गए थे। वह श्रृंखला के दौरान भारत के सबसे सफल गेंदबाज भी रहे।

आपको बता दें कि इस किताब में सिराज के अलावा ऋषभ पंत और नवदीप सैनी ने किस तरह दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ में प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रदर्शन किया और किस तरह दिनेश लाड ने किशोर शार्दुल ठाकुर के पिता को मनाया कि वह अपने बेटे को मुंबई जाने की स्वीकृति दें जिससे कि वह शीर्ष स्तर का क्रिकेट खेल सकें। इन बातों का भी जिक्र है।

इसके अलावा कैसे मां के निधन के कुछ दिन बाद चेतेश्वर अंडर-19 मैच खेलने गए और इस दौरान एक बूंद आंसू नहीं बहाया, फील्डिंग कोच आर श्रीधर ने पैर की मांसपेशियों में चोट के बावजूद हनुमा विहारी को कैसे कहा कि वह टीम के कर्जदार हैं और उन्हें सिडनी टेस्ट बचाने की जरूरत है। यह सब बातें भी इस किताब में विस्तृत तौर पर समझाई गई हैं।
(इनपुट: भाषा)