ट्रेनिंग के लिए पत्नी ने गहने बेचे, घर में रात भर में तैयार किया शूटिंग रेंज का खाका; पैरालंपिक मेडलिस्ट सिंहराज अडाना के लिए आसान नहीं थी टोक्यो की राह

सिंहराज सिर्फ 4 साल पहले इस खेल से जुड़े। वह फरीदाबाद के सैनिक स्कूल के चेयरमैन भी रह चुके हैं। उनके दादाजी देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे तथा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में कार्यरत थे।

Narendra Modi Singhraj Adhana Tokyo Paralympics Bronze Medal Team India प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंहराज अडाना की प्रशंसा की। उन्होंने अडाना के साथ बात भी की और कांस्य पदक जीतने के लिए बधाई दी। (सोर्स- @narendramodi/@NisithPramanik)

भारतीय निशानेबाज सिंहराज अडाना ने 31 अगस्त 2021 को टोक्यो पैरालंपिक्स में पी1 पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यह 39 साल के इस खिलाड़ी का निशानेबाजी से जुड़ने के बाद चार साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

हालांकि, हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले सिंहराज अडाना का टोक्यो तक का सफर आसान नहीं रहा है। इस दौरान उन्होंने आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा। उन्हें पत्नी के गहने तक बेचने पड़े।

सिंहराज अडाना कोविड-19 के कारण टोक्यो पैरालंपिक की तैयारी के लिए निशानेबाजी रेंज पर नहीं जा पाए, लेकिन निराश नहीं हुए। उन्होंने सिर्फ एक रात में खाका तैयार करके अपने घर पर ही रेंज का निर्माण कर दिया। इस बीच वह दौर भी आया जब निशानेबाजी के उनके सपने को पूरा करने के लिए उनकी पत्नी को अपने गहने बेचने पड़े थे। वह जानते थे कि यह बहुत बड़ा जुआ है। उनकी मां का भी ऐसा ही मानना था।

पोलियो से ग्रस्त यह निशानेबाज लॉकडाउन के दौरान अभ्यास शुरू करने को लेकर बेताब था। इससे उनकी रातों की नींद भी गायब हो गई थी। सिंहराज ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं जब अभ्यास नहीं कर पा रहा था तो मैं सोचने लगा था कि पदक जीतने का मेरा सपना खत्म हो चुका है। तब मेरे कोचेस ने मुझे घर में रेंज तैयार करने की सलाह दी।’

उन्होंने कहा, ‘मैं बेताब हो रहा था और अभ्यास नहीं कर पाने के कारण मेरी नींद उड़ गई थी, इसलिए मैंने रेंज तैयार करने के लिए अपने परिवार वालों से बात की तो वे सकते में आ गए, क्योंकि इसमें लाखों रुपये का खर्च आना था।’

सिंहराज ने कहा, ‘मेरी मां ने मुझसे केवल इतना कहा कि इतना सुनिश्चित कर लो कि यदि कुछ गड़बड़ होती है तो हमें दो जून की रोटी मिलती रहे। लेकिन मेरे परिवार और प्रशिक्षकों के समर्थन, भारतीय पैरालंपिक समिति और एनआरएआई (भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ) से मंजूरी और मदद के कारण हम अपने मिशन में कामयाब रहे और जल्द ही रेंज बनकर तैयार हो गया।’

उन्होंने इस रेंज का खाका स्वयं तैयार किया था। सिंहराज ने कहा, ‘मैंने एक रात में खाका तैयार किया। मेरे प्रशिक्षकों ने मुझसे कहा कि यदि हम रेंज तैयार कर रहे हैं तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए, क्योंकि इससे मुझे न सिर्फ टोक्यो बल्कि पेरिस खेलों में भी मदद मिलेगी।’

सिंहराज का इस खेल से पहला परिचय उनके भतीजे ने कराया था, जिनके साथ वह पहली बार निशानेबाजी रेंज पर गए थे। उन्होंने कहा, ‘मेरा भतीजा गौरव अडाना निशानेबाज है। जब वे अभ्यास कर रहे थे तो मैं मुस्करा रहा था तो कोच ने मुझसे इसका कारण पूछा। उस दिन मैंने निशानेबाजी में अपना हाथ आजमाया तथा पांच में से चार सही निशाने लगाए। इनमें परफेक्ट 10 भी शामिल था।’

उन्होंने कहा, ‘कोच भी हैरान थे। उन्होंने मुझसे इस खेल पर ध्यान देने के लिए कहा। उन्होंने तब मुझसे कहा था कि मैं देश का नाम रोशन कर सकता हूं। ऐसा मैं शुरू से चाहता था। मैं इससे पहले सामाजिक सेवा के कार्यों से भी जुड़ा रहा था।’ पदक तक पहुंचने की राह में अपने संघर्षों के बारे में बात करते हुए सिंहराज भावुक हो गए और इस बारे में अपनी भावनाओं को बहुत अधिक व्यक्त नहीं कर पाए।

उन्होंने कहा, ‘मैं इस पर बाद में बात करूंगा। पैरा खिलाड़ियों की जिंदगी बहुत मुश्किल होती है। मेरे दोनों पांवों में पोलियो है। मैं बैसाखी के सहारे चलता था लेकिन मेरी मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने मुझे बिना सहारे के पांवों पर खड़ा होने के लिए प्रेरित किया।’

सिंहराज सिर्फ 4 साल पहले इस खेल से जुड़े। वह फरीदाबाद के सैनिक स्कूल के चेयरमैन भी रह चुके हैं। उनके दादाजी देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे तथा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में कार्यरत थे।

सिंहराज ने यूएई के अल अईन में 2021 पैरा खेल विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। तब उन्होंने उज्बेकिस्तान के सर्वर इब्रागिमोव को पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा के फाइनल में 2.8 अंकों से हरा गोल्ड मेडल जीता था।

सिंहराज अडाना के प्रदर्शन की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बहुत सी हस्तियों ने सराहाना की है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सिंहराज अडाना को बधाई देते हुए कहा कि देश को उन पर गर्व है।

कोविंद ने ट्वीट किया, ‘सिंहराज अडाना का पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतना उत्कृष्टता हासिल करने के उनके सफर में दृढ़निश्चय का शीर्ष बिंदु है। इस शानदार उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई। देश को आप पर गर्व है। आगामी वर्षों में आप और अधिक गौरव हासिल करें।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अडाना की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर काफी सफलताएं हासिल की। प्रधानमंत्री ने साथ ही अडाना के साथ बात भी की और कांस्य पदक जीतने के लिए उन्हें बधाई दी।

मोदी ने ट्वीट किया, ‘सिंहराज अडाना का अद्वितीय प्रदर्शन। भारत के प्रतिभाशाली निशानेबाज ने प्रतिष्ठित कांस्य पदक जीता। उन्होंने कड़ी मेहनत करके उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की हैं। उन्हें बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं।’