तमिलनाडु विधानसभा के भीतर घटी चीरहरण की वो घटना, जिसने जयललिता को बना दिया था पूरी राज्य की अम्मा

इस घटना के दो साल बाद हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी एआईडीएमके और कांग्रेस गठबंधन को राज्य की 234 में से 225 सीट पर जीत मिली थी और डीएमके का पत्ता साफ़ हो गया था।

साड़ी खींचने की घटना से गुस्साई जयललिता ने प्रतिज्ञा लेते हुए कहा था कि वे मुख्यमंत्री बनकर ही दोबारा से सदन में लौटेंगी। (एक्सप्रेस फोटो)

बीते दिनों कंगना रनौत की फिल्म थलाइवी बड़े पर्दे पर रिलीज हुई। यह फिल्म तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री व अन्नाद्रमुक की नेता जयललिता की बायोपिक थी। फिल्म आने के बाद से ही दिवंगत महिला नेता जयललिता की चर्चा खूब हो रही है। जयललिता को तमिल लोग अम्मा के नाम से पुकारते थे। उनके अम्मा बनने की कहानी तमिलनाडु विधानसभा के अंदर हुई चीरहरण की एक घटना से शुरू हुई थी। तो आइये जानते हैं वो पूरी कहानी जिसने जयललिता को पूरे राज्य की अम्मा बना दिया।

दरअसल साल 1989 के मार्च महीने में 25 तारीख को तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि के नेतृत्व वाली सरकार विधानसभा में बजट पेश कर रही थी। चूंकि वित्त विभाग का जिम्मा करुणानिधि के पास ही था तो इसलिए वे ही सदन के सामने अपना बजट भाषण पढ़ने की तैयारी कर रहे थे। करुणानिधि ने जैसे ही बजट भाषण पढ़ना शुरू किया तो कांग्रेस विधायकों ने कुछ दिन पहले विपक्ष की नेता जयललिता के खिलाफ हुई एक पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा।

चूंकि गृह मंत्रालय का कार्यभार भी मुख्यमंत्री करुणानिधि के पास ही था तो उन्होंने सदन से इसपर चर्चा की अनुमति मांगी। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा चर्चा की अनुमति दिए जाने से पहले ही सदन के अंदर मौजूद रहीं जयललिता ने मुख्यमंत्री पर सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर चर्चा कराने का अनुरोध किया। लेकिन स्पीकर ने इससे मना कर दिया।

इसके बाद एआईएडीएमके के सदस्य चिल्लाते हुए वेल में चले गए। इसी बीच एक विपक्षी विधायक ने मुख्यमंत्री करुणानिधि पर हमला कर दिया जिससे उनका चश्मा टूट कर गिर गया। इसके बाद दोनों तरफ से एक दूसरे के ऊपर चीजों को फेंका जाने लगा। जिसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। कहा जाता है कि इस घटना के दौरान जब जयललिता सदन से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं तो तभी एक डीएमके विधायक ने उन्हें बाहर निकलने से रोका और जयललिता की साड़ी खींचने की कोशिश की। जिसे जयललिता जमीन पर नीचे गिर गई। हालांकि बाद में जैसे तैसे एआईएडीएमके विधायकों ने जयललिता को सदन के बाहर निकाला।

25 मार्च 1989 को हुई इस घटना से गुस्साई जयललिता ने प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि जबतक एक महिला के लिए सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने लायक माहौल नहीं बन जाता है तबतक वे विधानसभा में कदम नहीं रखेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे मुख्यमंत्री बनकर ही दोबारा से सदन में लौटेंगी। इस घटना के बाद करुणानिधि की पार्टी डीएमके का ग्राफ लगातार नीचे गिरता गया और जयललिता तमिलनाडु के लोगों के बीच मशहूर होने लगीं. जयललिता को अम्मा नाम से जाना जाने लगा। 

इस घटना के दो साल बाद हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी एआईडीएमके और कांग्रेस गठबंधन को राज्य की 234 में से 225 सीट पर जीत मिली और डीएमके का पत्ता साफ़ हो गया। एआईएडीएमके को मिली शानदार जीत के बाद जयललिता पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं।