ताप बिजलीघरों में कोयले की कमी,बिजली संकट से निपटने की चुनौती

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की नई रिपोर्ट में चेताया गया है कि 135 ताप बिजलीघरों में आठ दिनों से भी कम का कोयला भंडार बचा है।

(बाएं) एसएन तिवारी, विपणन निदेशक, कोल इंडिया। अनिल जैन, कोयला सचिव। फाइल फोटो।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की नई रिपोर्ट में चेताया गया है कि 135 ताप बिजलीघरों में आठ दिनों से भी कम का कोयला भंडार बचा है। 10 बिजलीघरों में शून्य है कोयले का भंडार। भारत में बढ़ती बिजली की मांग पूरी करने में कोयला आधारित ताप बिजलीघर पार नहीं पा रहे हैं। बीते दो महीनों में राज्यों के अंतर्गत आने वाले कई बिजलीघरों में कोयले की कमी चल रही है। जानकार इसकी वजह मानसून के चलते कोयला आपूर्ति में आई बाधा, भुगतान में गड़बड़ी और बिजली की बढ़ी हुई मांग को बता रहे हैं।
क्या है चेतावनी
अपनी नई रिपोर्ट में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने जिन 135 ताप बिजलीघरों को आडिट किया है, उनमें से 103 में एक हफ्ता पहले आठ दिनों से भी कम का कोयला भंडार बचा हुआ था। अगस्त में यह आंकड़ा 74 था। केंद्र सरकार कम कोयला भंडार वाले ताप बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति में प्राथमिकता देने की बात कह चुकी है। इसके बावजूद केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण का आंकड़ा दिखा रहा है कि पिछले एक महीने में ऐसे ताप बिजलीघरों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनके पास आठ दिन के लिए भी पर्याप्त कोयला नहीं है। ऐसे ताप बिजलीघर, जिनमें कोयला पूरी तरह खत्म हो चुका है, उनकी संख्या भी अब बढ़कर 10 हो चुकी है जबकि 30 अगस्त को ऐसे सिर्फ तीन बिजलीघर थे।
क्यों खड़ा हुआ संकट
कोरोना की वजह से लगे प्रतिबंधों में कमी आने के बाद भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। सात जुलाई को यह अपने शीर्ष 200.57 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई थी। यह मांग अब भी 190 गीगावाट से ऊपर बनी हुई है। जब देश में बिजली की मांग चरम पर थी, तभी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे चार बड़े राज्यों ने अपने अंतर्गत आने वाली बिजली इकाइयों के कोयला इस्तेमाल के लिए कोल इंडिया को किए जाने वाले भुगतान में चूक भी कर दी, जिसके बाद कोल इंडिया ने इनकी कोयला आपूर्ति कम कर दी। इससे बिजली संकट और गहरा गया। कोल इंडिया के मुताबिक, राज्य सरकारों के अंतर्गत आने वाले बिजलीघरों और एनटीपीसी जैसी सरकारी कंपनियों को कोयले की सप्लाई एक समझौते के तहत होती है। इनके साथ कोल इंडिया, फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट करता है। इसके बाद कोयले की सप्लाई पहले ही कर दी जाती है और राज्य इसके लिए बाद में भुगतान करते हैं।
क्या कहता है कोयला मंत्रालय
बिजलीघरों में कोयले के भंडार में कमी के बाद केंद्रीय बिजली और कोयला मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि कोयले की आपूर्ति में अधिक भंडारण वाले बिजलीघरों के बजाए कम भंडारण वाले बिजलीघरों को वरीयता दी जानी चाहिए। फिर भी कमी बनी हुई है। इसके अलावा मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को कोयला आयात के जरिए कमी दूर करने का उपाय भी सुझाया था। भारत में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयले का भंडार है। कोल इंडिया, सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है। भारत की कुल बिजली मांग का करीब 70 फीसद कोयले से ही आता है। भारत में कोयले की कुल खपत का तीन-चौथाई हिस्सा बिजली उत्पादन पर ही खर्च होता है। इतने बड़े भंडार और इतने ज्यादा महत्त्व के बावजूद भारत दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
खपत और आपूर्ति का फर्क
देश में बिजली की कुल खपत 12,420 करोड़ यूनिट है। कोयला खत्म होने पर आपूर्ति में 33 फीसद तक की कमी आने की आशंका है। संकट से निपटने के लिए सरकार ने 700 मीट्रिक टन कोयला खपत का अनुमान लगाया है और आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। देश में भी चीन की तरह ही बिजली संकट की आशंका है। विशेषज्ञों ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय व अन्य एजंसियों की तरफ से जारी कोयला उपलब्धता के आंकड़ों का आकलन कर यह चेतावनी दी है। मंत्रालय के मुताबिक, देश के 135 ताप बिजलीघर कुल खपत का 66.35 फीसद बिजली उत्पादन करते हैं। इस लिहाज से देखें तो 72 संयंत्र बंद होने पर कुल खपत में 33 फीसद बिजली की कमी हो सकती है। सरकार के अनुसार, कोरोना से पहले अगस्त-सितंबर 2019 में देश में रोजाना 10,660 करोड़ यूनिट बिजली की खपत थी, जो अगस्त-सितंबर 2021 में बढ़कर 12,420 करोड़ यूनिट हो चुकी है। उस दौरान ताप बिजलीघरों में कुल खपत का 61.91 फीसद बिजली उत्पादन हो रहा था। इसके चलते दो साल में इन संयत्रों में कोयले की खपत भी 18 फीसद बढ़ चुकी है।

चिंता और उपाय

दो साल में इंडोनेशियाई आयातित कोयले की कीमत प्रति टन 60 डॉलर से तीन गुना बढ़कर 200 डॉलर तक हो गई। इससे 2019-20 से ही आयात घट रहा है। लेकिन तब घरेलू उत्पादन से इसे पूरा कर लिया था।केंद्र ने स्टॉक की सप्ताह में दो बार समीक्षा के लिए कोयला मंत्रालय के नेतृत्व में समिति बनाई है। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण, कोल इंडिया, पावर सिस्टम आॅपरेशन कारपोरेशन, रेलवे और ऊर्जा मंत्रालय की भी कोर प्रबंधन टीम बनाई गई है, जो रोज निगरानी कर रही है। सरकार का विश्लेषण है कि अर्थव्यवस्था में सुधार वजह से देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी। साथ ही, कोयला खदान क्षेत्रों में भारी बारिश से सितंबर में भारी बारिश से उत्पादन व आपूर्ति प्रभावित हुई।कोयला महंगा होने से खरीद सीमित हो रही है, उत्पादन भी कम हुआ है। मानसून से पहले स्टॉक नहीं हुआ। सरकार के अनुसार कंपनियों को यह कदम पहले से उठाना चाहिए था। राज्यों पर भारी देनदारी : यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश पर कंपनियों का भारी बकाया।

क्या कहते हैं जानकार

कंपनी तापीय बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। हम अतिरिक्त मात्रा को बढ़ाकर जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के अपने प्रयासों को बढ़ा रहे हैं, लेकिन मांग अब आपूर्ति से कहीं अधिक है।

  • एसएन तिवारी,विपणन निदेशक,कोल इंडिया

कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों को बार-बार इस मसले पर ध्यान दिलाने की कोशिश की है कि बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक लगातार घट रहा है। कई चेतावनी के बाद भी अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।

  • अनिल जैन,कोयला सचिव