तालिबान से पीछे के रास्ते से बातचीत कर रही मोदी सरकार, बोले पैनलिस्ट, कहा- यूपी चुनाव की वजह से उछल रहा मुद्दा

डिबेट शो के दौरान इस्लामिक स्कॉलर शोएब जमई ने कहा कि मोदी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसका तालिबान पर क्या स्टैंड है। उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव की वजह से तालिबान का मुद्दा उठाया जा र हा है।

काबुल की एक चेकपोस्ट पर तालिबानी। फोटो- रॉयटर्स

तालिबान के मुद्दे पर भारत में भी लोगों में कई राय देखने को मिल रही हैं। सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने तालिबानियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से कर दी थी। इसके बाद उनपर राजद्रोह का मुकदमा भी दर्ज हुआ है। वहीं AIMPLB के सज्जाद नोमानी ने भी तालिबानियों की तारीफ़ में कसीदे पढ़े थे। आजतक चैनल पर एक बहस के दौरान इस्लामिक स्कॉलर शोएब जमई ने कहा शफीकुर्रहमान ने अपनी सफाई दे दी है लेकिन मैं भारत सरकार का स्टैंड जानना चाहता हूं।

उन्होंने कहा, मोदी जी ने तालिबान के बारे में क्या किया। उनका कहा है कि अमेरिका में तालिबान और यूएस के बीच जो समझौता हुआ,उसमें भारत शामिल था। शोएब ने कहा, हमारे डिप्लोमैटिक चैनल पीछे के रास्ते से बातचीत कर रहे हैं। इसे जानने का अधिकार सबको है। रूस उसको मान्यता दे रहा है, सऊदी अरब ने भी बयान दे दिया। इस बहस में शोएब जमई तालिबान की मान्यता को लेकर सफाई देने लगे।

ऐंकर चित्रा त्रिपाठी ने पूछा कि तालिबान परस्ती पर क्या कहा जाए? शोएब ने इसपर कहा कि बात तो डिप्लोमैसी की हो रही है, मुद्दा भटक क्यों गया? उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश का चुनाव आ रहा है इसलिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है।

शोएब की बात पर संबित पात्रा ने कहा कि बर्क जैसे लोगों ने हिंदुस्तानियों को धिक्कार दिया। पात्रा ने कहा, आश्चर्य इस बात का है कि इन लोगों का समर्थन भी किया जा रहा है। स्वरा भास्कर ने अपने ट्वीट में एक बहाना ढूंढ र ही हैं कि तालिबान के लिए इतना कुछ कहा जा रहा है लेकिन भगवा आतंवाद की बात नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि लेफ्ट के लोगों को लिबरल कहना गलत होगा क्योंकि वे बहुत कट्टरपंथी होते हैं। वहीं नोमानी तो तालिबानी प्रवक्ता से भी दो कदम आगे चले गए हैं। उनका कहना हैकि तालिबान में अमन चैन का माहौल है। शर्म आती है उनकी बात पर। ये वही व्यक्ति हैं जो तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने इनसे एफिडेविट मांगा था। इन्होंने लिखकर कहा था कि महिलाएं कम अक्ल होती हैं इसलिए उनकी बात नहीं सुनी जानी चाहिए। इनकी सोच तो तालिबानी ही है।