तालिबान से बातचीत पर दिग्विजय का तंज, अमेरिका के दबाव में पहले से चर्चा कर रहे थे मोदी-शाह

दिग्विजय ने तालिबान से भरता की बातचीत को लेकर कई ट्वीट किए हैं और आरोप लगाया है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अमेरिका के दबाव में पहले से चर्चा कर रहे थे।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘आज कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई से मुलाकात की। बैठक दोहा स्थित भारतीय दूतावास में तालिबान के अनुरोध पर हुई।

अफगानिस्‍तान पर तालिबान के नियंत्रण के बाद से वहां के हालात ठीक नहीं है। इसी बीच भारत ने तालिबान से औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। इसको लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार पर तंज़ कसा है।

दिग्विजय ने तालिबान से भरता की बातचीत को लेकर कई ट्वीट किए हैं और आरोप लगाया है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अमेरिका के दबाव में पहले से चर्चा कर रहे थे। दिग्विजय ने अपना 3 दिन पुराना एक ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, “अब अधिकारिक तौर पर मोदीभाजपा सरकार ने तालीबान से चर्चा करने की बात स्वीकार कर ली है। जो मैं शुरू से कह रहा था फिर सही निकला। अमेरिका के दबाव में मोदीशाह सरकार क़तार में तालीबान से पूर्व से ही चर्चा कर रही थी। मोदी भक्तों कुछ कहोगे कौन तालीबान समर्थक है?”

इससे पहले 29 अगस्त को उन्होंने लिखा था, “अब भारत की अध्यक्षता में तालिबान को आतंकवाद की सूची से बाहर कर देने के समाचार हैं। क्या यह सही है? केंद्र सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए। पूर्व से समाचार तो आ रहे थे कि अमेरिका के दबाव में भारत सरकार तालीबान से क़तार में चर्चा कर रहा है लेकिन हमारी सरकार मौन रही।”

वहीं एक अन्य ट्वीट में कांग्रेस नेता ने लिखा, “जैसी जानकारी मिल रही है, पाकिस्तान ने जेहादी आतंकवादियों को अफ़ग़ानिस्तान तालीबान की सुरक्षा में भेज दिया है। यदि यह सही है तो क्या मोदीशाहभाजपा सरकार तालीबान से चर्चा करते समय तालीबान के समक्ष यह शर्त रखेंगे कि वे भारत पर आतंकी हमला करने वालों को संरक्षण नहीं देंगे?”

बता दें पहले औपचारिक और सार्वजनिक रूप से स्वीकृत संपर्क में कतर में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने मंगलवार को तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई से मुलाकात की। उन्होंने भारत की उन चिंताओं को उठाया कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि चर्चा अफगानिस्तान में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और जल्द वापसी तथा अफगान नागरिकों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की भारत यात्रा पर केंद्रित रही।भारतीय राजदूत और तालिबान नेता के बीच बैठक दोहा स्थित भारतीय दूतावास में तालिबान के अनुरोध पर हुई। मंत्रालय ने कहा कि तालिबान के प्रतिनिधि ने राजदूत को आश्वासन दिया कि ‘‘इन मुद्दों’’ पर सकारात्मक रूप से गौर किया जायेगा।