तीनों कृषि कानूनों पर रोक तो किसान संगठन किसके खिलाफ कर रहे विरोध- SC, सॉलिसिटर जनरल बोले- प्रदर्शन का सवाल ही नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि जब तीन नए कृषि कानूनों पर रोक लगी हुई है तो किसान किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कोर्ट ने लखीमपुर खीरी की घटना पर भी कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है।

supreme court on farmer protest, lakhimpur kheri, rakesh tikait तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी गई है, तो किसान संगठन किसके खिलाफ विरोध कर रहे हैं- सुप्रीम कोर्ट (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)

एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी गई है, तो किसान संगठन किसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने भी प्रदर्शन पर सवाल उठाया।

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि कानून की वैधता को न्यायालय में चुनौती देने के बाद ऐसे विरोध-प्रदर्शन करने का सवाल ही कहां उठता है। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने रविवार की लखीमपुर खीरी घटना का जिक्र किया, जिसमें आठ लोग मारे गए थे। इस पर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसी कोई घटना होने पर कोई इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता।

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई मामला जब सर्वोच्च संवैधानिक अदालत के समक्ष होता है, तो उसी मुद्दे को लेकर कोई भी सड़क पर नहीं उतर सकता। शीर्ष अदालत तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में एक किसान संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यहां जंतर मंतर पर ‘सत्याग्रह’ करने की अनुमति देने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट, किसानों के संगठन ‘किसान महापंचायत’ और उसके अध्यक्ष की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में संबंधित एजेंसियों को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण एवं गैर-हिंसक ‘सत्याग्रह’ के आयोजन के लिए कम से कम 200 किसानों के लिए जगह उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है।

पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है। पीठ ने तीन कृषि कानूनों की वैधता को चुनौती देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर किसान संगठन की याचिका भी अपने यहां स्थानांतरित कर लिया।

कई किसान संगठन तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 10 महीने से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का साफ कहना है कि सरकार ये कानून वापस ले, जबकि सरकार इसमें संशोधन की बात कह रही है। यह कानून पिछले साल पारित हुआ था, जिसके विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। इन कानूनों का विरोध तो पंजाब से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह मुख्य रूप से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैल गया।