तेलंगाना में TRS को झटका! पूर्व मंत्री राजेंद्र ने छोड़ा MLA पद, भाजपा में जानें की अटकल

इस्तीफा देने से पहले राजेंद्र ने पत्रकारों से कहा कि उनके कई शुभचिंतकों ने उन्हें इस्तीफा द देने की सलाह दी लेकिन वह अपने निर्वाचन क्षेत्र और तेलंगाना के लोगों के आत्म सम्मान की खातिर ऐसा कर रहे हैं।

भाषा हैदराबाद | Updated: June 12, 2021 4:10 PM
तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की तस्वीर। एक्सप्रेस आर्काइव

तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के वरिष्ठ नेता और तेलंगाना के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ई. राजेंद्र ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। कुछ दिनों पहले उन्होंने पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था। हुजूराबाद निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले राजेंद्र सत्तारूढ़ टीआरएस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं सीधा अध्यक्ष को इस्तीफा पत्र देना चाहता था लेकिन मैं उनसे मिल नहीं पाया, तो इन परिस्थितियों में मुझे विधानसभा सचिव को अपना इस्तीफा सौंपना पड़ा।’

इस्तीफा देने से पहले राजेंद्र ने पत्रकारों से कहा कि उनके कई शुभचिंतकों ने उन्हें इस्तीफा द देने की सलाह दी लेकिन वह अपने निर्वाचन क्षेत्र और तेलंगाना के लोगों के आत्म सम्मान की खातिर ऐसा कर रहे हैं। राजेंद्र के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डी की मौजूदगी में 14 जून को भगवा पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने बताया, ‘उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से सीधे मुलाकात की थी। आलाकमान ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।’ राजेंद्र के अलावा टीआरएस के कुछ और नेता भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

राजेंद्र को उन शिकायतों के बाद पिछले महीने मंत्रिमंडल से निकाल दिया गया था कि उनके परिवार के सदस्यों के मालिकाना हक वाली कंपनियों ने राज्य में जमीनों पर कब्जा किया हुआ है।

कुछ समय पहले यह भी चर्चा थी कि मुख्यमंत्री केसी राव बेटे को सीएम बनाना चाहते हैं। बताया जा रहा था कि वह राष्ट्रीय राजनीति पर ध्यान देना चाहते थे। इससे भी कई राजनेता नाख़ुश थे। पशु पालन मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव ने यह भी कहा था कि पार्टी के चार बड़े नेता उन्हें इस योग्य मान चुके हैं।

अभी से जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं ऐसे में केसीआर राज्य में भी बिल्कुल ढील नहीं देंगे। कहीं ऐसा न हो कि राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने के चक्कर में राज्य की सत्ता से भी हाथ धोना पड़ जाए।