दिलीप कुमार और लता मंगेशकर के बीच 13 सालों तक बंद थी बात, 1970 में जाकर हुई थी सुलह; जानें क्या थी वजह

दिलीप कुमार और लता मंगेशकर के बीच एक गाने की रिकॉर्डिंग को लेकर 13 सालों तक बातचीत बंद रही थी। यह सिलसिला 1970 तक जारी था।

dilip kumar, lata mangeshkar बॉलीवुड एक्टर दिलीप कुमार और मशहूर गायिका लता मंगेशकर (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

बॉलीवुड के ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार ने अपनी फिल्मों और अपने अंदाज से हिंदी सिनेमा में जबरदस्त पहचान बनाई थी। दिलीप कुमार ने फिल्म ‘ज्वार भाटा’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और इसके बाद वह कई हिट फिल्मों में नजर आए थे। मशहूर गायिका लता मंगेशकर को एक्टर अपनी छोटी बहन मानते थे और वह भी एक्टर को राखी बांधती थीं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब दिलीप कुमार और लता मंगेशकर ने करीब 13 सालों तक एक-दूसरे से बात नहीं की थी और यह सिलसिला 1970 तक जारी था।

पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक साल 1957 में फिल्म ‘मुसाफिर’ के गाने ‘लागी नाहीं छूटे’ को गाने के लिए सलिल चौधरी ने दिलीप कुमार को चुना था। हालांकि गाने की दूसरी मुख्य गायिका लता मंगेशकर इस बात से अंजान थीं। वहीं जब उन्हें दिलीप कुमार के बारे में पता चला तो वह सोच में पड़ गई थीं कि वह गाना गा भी पाएंगे या नहीं।

‘लागी छूटे ना’ को सलिल चौधरी ने कंपोज किया था, जिसमें उन्होंने राग पीलू में ठुमरी को चुना था। दूसरी ओर दिलीप कुमार ने सितार के साथ इस धुन का खूब रियाज किया, लेकिन रिकॉर्डिंग के वक्त दिलीप कुमार कतराने लगे, क्योंकि लता मंगेशकर के साथ गाना गाने में वह थोड़ा घबरा रहे थे। दिलीप कुमार की घबराहट को दूर करने के लिए सलिल चौधरी ने उन्हें ब्रांडी का एक छोटा पेग दे दिया।

ब्रांडी पीने के बाद भी दिलीप कुमार ने लता मंगेशकर के साथ गाना तो गाया, लेकिन रिकॉर्डिंग में उनकी आवाज थोड़ी कमजोर रही, साथ ही परिणाम भी संतोषजनक नहीं निकला। दूसरी ओर लता मंगेशकर ने रिकॉर्डिंग में अपना पूरा-पूरा योगदान दिया। इस रिकॉर्डिंग के बाद से ही दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए, जो कि करीब 13 सालों तक रहा। 1970 में दोनों के बीच यह मनमुटाव खत्म हो गया और लता मंगेशकर ने दिलीप कुमार को राखी बांधनी भी शुरू कर दी।

बता दें कि इस रिकॉर्डिंग से पहले भी दिलीप कुमार और लता मंगेशकर के बीच एक टिप्पणी को लेकर थोड़े मतभेद हो गए थे। दरअसल, दिलीप कुमार ने लता मंगेशकर को देखकर कहा था कि मराठियों की उर्दू बिल्कुल दाल-चावल की तरह होती है। उनकी यह बात सिंगर को चुभ गई थी, जिसके बाद उन्होंने उर्दू सीखने तक फैसला ले लिया था।