दिल्ली में बढ़ रहे आत्मदाह के मामले, मनोवैज्ञानिक बोले- अपनी बातें मनवाने और जुनून में आम लोग दे रहे हैं जानें

डॉक्टरों का मानना है कि कल्ट या मास सुसाइड किसी धर्म या संप्रदाय से जुड़ा होता है। जब कोई व्यक्ति हद से ज्यादा किसी की भक्ति में लीन हो जाता है या अंधविश्वास में यकीन करने लगता है तो उसके बाद अकसर कल्ट सुसाइड ही करता है।

Suicide, Lost life राजधानी में तीन दिनों में दो लोगों ने कर ली खुदकुशी। (Photo Source: Thinkstock Images)

राजधानी में खुदकुशी के मामले फिर बढ़ रहे हैं। आए दिन छोटी-छोटी बातों पर या फिर प्रशासनिक व्यवस्था से नाखुश हो कर लोग खुदकुशी और खुदकुशी के प्रयास की कोशिश कर सरकार का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर रहे हैं। हालांकि दिल्ली में 2011 से 2019 तक के आंकड़े इस बात के गवाह है कि खुदकुशी के मामलों में अब बहुत कमी आई है। 2011 में जहां 103, वहीं 2019 में संख्या 22 तक पहुंच गई।

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि यह खुदकुशी के अलग तरह का मामला है। यह कोई कल्ट सुसाइड या मास सुसाइड नहीं है बल्कि अपनी बातें मनवाने के लिए और एक बार जेहन में जुनून आने के बाद आम लोगों में खुदकुशी की प्रवृत्ति पाई जाती है। मनोवैज्ञानिक और प्रेरकों का तो कहना है कि इसके लिए समाज को जागृत करने की आवश्यकता है। बीते तीन दिनों में दो लोगों ने अलग-अलग जगहों पर आत्मदाह की कोशिश की। बुधवार को तालकटोरा स्टेडियम के बाहर एक बुजुर्ग ने आत्मदाह की कोशिश की।

मौके पर पहुंची पुलिस ने बुजुर्ग को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। इस मामले में पुलिस का कहना है कि बुजुर्ग किसी धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं। इससे परेशान होकर यह कदम उठाया है। वहीं, सोमवार को एक महिला और पुरुष ने सुप्रीम कोर्ट के गेट के बाहर खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग के हवाले कर दिया था। हालांकि, आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आग बुझाई और दोनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।

महिला ने आत्मदाह की कोशिश से पहले फेसबुक पर लाइव कर कथित तौर पर एक जनप्रतिनिधि पर बलात्कार के आरोप लगाए। इस मामले में कहीं सुनवाई नहीं होने और उन पर गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज होने के कारण यह कदम उठाने की बात सोशल मीडिया पर कही थी। डॉक्टरों का मानना है कि कल्ट या मास सुसाइड किसी धर्म या संप्रदाय से जुड़ा होता है।

जब कोई व्यक्ति हद से ज्यादा किसी की भक्ति में लीन हो जाता है या अंधविश्वास में यकीन करने लगता है तो उसके बाद अकसर कल्ट सुसाइड ही करता है। हालांकि हमारे देश में सामूहिक आत्महत्या के उदाहरण न के बराबर हैं। बुराड़ी में 11 लोगों की खुदकुशी को इस श्रेणी में कहा जा सकता है।