दिल्ली हाई कोर्ट ने चेताया, अब बहुत हुआ केंद्र ऑक्सीजन दे, नहीं तो अवमानना मामले को तैयार रहे

अदालत ने रेखांकित किया कि 20 अप्रैल से ही दिल्ली को 480 मीट्रिक टन और उसके बाद 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का आबंटन किया गया लेकिन एक दिन भी इतनी मात्रा में आपूर्ति नहीं की गई।

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राष्ट्रीय राजधानी के बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से डॉक्टर सहित कई मरीजों की मौत से नाराज दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह दिल्ली को उसके हिस्से की 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की रोजाना आपूर्ति सुनिश्चित करे, अन्यथा अवमानना की कार्यवाही के लिए तैयार रहे।

अदालत ने कहा ‘अब बहुत हुआ। सिर के ऊपर से काफी पानी गुजर चुका है।’ न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के पीठ ने कहा कि केंद्र सुनिश्चित करे कि दिल्ली को आबंटित मात्रा 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिले। कोर्ट ने केंद्र को चेताया कि इसमें विफल होने पर वह अवमानना की कार्यवाही कर सकता है।

दो सदस्यों के पीठ ने ऑक्सीजन संकट और कोविड-19 से जुड़े अन्य मामलों पर अवकाश के दिन करीब चार घंटे की सुनवाई की। अदालत ने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर वे दिल्ली को निर्धारित मात्रा में ऑक्सीजन नहीं देते हैं तो सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई में उपस्थित रहें।

पीठ ने कहा, ‘हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह सुनिश्चित करे कि आज किसी भी हालत में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को आबंटित 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिल जाए। यह विचार करते हुए कि दिल्ली औद्योगिक राज्य नहीं है और अन्य राज्यों की तरह उसके पास अपने क्रायोजेनिक टैंकर नहीं है जिसका अनुरोध आपदा प्रबंधन कानून के तहत किया जा सकता है, यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह टैंकरों की भी व्यवस्था करे ताकि दिल्ली की जरूरत को पूरा किया जा सके और यह आबंटन केवल कागज पर नहीं रहे।’

अदालत ने रेखांकित किया कि 20 अप्रैल से ही दिल्ली को 480 मीट्रिक टन और उसके बाद 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का आबंटन किया गया लेकिन एक दिन भी इतनी मात्रा में आपूर्ति नहीं की गई।

अदालत ने कहा, ‘ हम स्पष्ट करते हैं कि हम अनुपालन नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही भी शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। अमित महाजन सुनिश्चित करेंगे कि इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहुंचे।’ जब अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा ने पीठ से अनुरोध किया कि फैसले को तीन मई या आधे घंटे के लिए टाल दिया जाए, खासतौर पर अवमानना शुरू करने की चेतावनी को तो अदालत ने उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

पीठ ने कहा, ‘सिर के ऊपर से काफी पानी गुजर चुका है। अब हमें काम से मतलब है। बस बहुत हुआ।’ पीठ ने कहा, ‘आप (केंद्र) ने आबंटित किया, आप इसे पूरा करें। क्या आपका मतलब यह है कि जब दिल्ली में लोग मर रहे हैं तो हम अपनी आंखें बंद कर लें? अब बहुत हुआ। कौन आबंटित ऑक्सीजन से एक ग्राम भी अधिक की मांग कर रहा है? अगर आप आपूर्ति नहीं कर सकते, तो मत करिए। हम सोमवार को आपका जवाब देखेंगे।’

शर्मा द्वारा बार-बार आदेश के अवमानना कार्यवाही वाले हिस्से को टालने के अनुरोध किए जाने पर अदालत ने कहा, ‘यह बहस का नया तरीका है- कहना कि यह मत करो, वह मत करो। हम इसे स्वीकार नहीं करते। हमें पता है कि क्या करना है।’ शर्मा ने कहा कि सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता सोमवार को दिल्ली को आबंटित ऑक्सीजन और उसकी आपूर्ति संबंधी जानकारी अदालत को देंगे।

इस पर अदालत ने कहा कि जिस मामले पर सॉलिसीटर जनरल जानकारी देंगे वह दिल्ली को ऑक्सीजन का आबंटन बढ़ाने से जुड़ा है। नाराज न्यायमूर्ति सांघी ने कहा, ‘हमने आदेश दे दिया है और आप उस आदेश को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई खत्म कर दी।

अदालत ने बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों पर संज्ञान लेते हुए निर्देश जारी किए और साथ ही दिल्ली सरकार के अधिकारियों द्वारा आपात संदेश पर कार्रवाई करने में असमर्थता पर चिंता जताई। दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि कुछ आपूर्तिकर्ता या तो आपूर्ति नहीं कर रहे हैं या कम मात्रा में ऑक्सीजन दे रहे हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई में इन आपूर्तिकर्ताओं को पेश करें।