दीन दयाल उपाध्याय: हाथ में पांच रुपए का नोट पकड़े पटरी के पास मिली थी लाश, जानिए ट्रेन के आखिरी सफर में कौन थे साथ, सीबीआई निदेशक लोबो को पूरी नहीं करने दी गई थी जांच

1971 में नई दिल्ली में एक सभा में नाना जी देशमुख ने कहा था, “आज हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 55वीं जयंती मना रहे हैं, लेकिन हमारी आंखों में आंसू आज भी हैं।” न तो सीबीआई और न ही चंद्रचूड़ जांच आयोग यह बता सका कि आखिर दीनदयालजी की हत्या क्यों और किसने की।

Deen Dayal Upadhyay Birthday, BJP, Jansangh दीन दयाल उपाध्याय(फोटो सोर्स: Youtube)

भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 में हुआ था। कम उम्र में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। 15 साल तक दीनदयाल उपाध्याय ने जनसंघ के महामंत्री पद रहे और पार्टी की जड़ों को मजबूत करने का काम किया। आगे चलकर 1967 में उन्हें पार्टी के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि अध्यक्ष बनने के अगले ही साल, 10 फरवरी 1968 को उनकी रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मौत ने पूरे देश को चकित कर दिया।

पंडित दीनदयाल पटना जाने के लिए लखनऊ से सियालदाह एक्सप्रेस में बैठे थे। रात के करीब 2 बजे जब ट्रेन मुगलसराय स्टेशन पहुंची, तो दीनदयाल ट्रेन में नहीं थे। 11 फरवरी 1968 को स्टेशन के नजदीक ही उनका शव पड़ा मिला। उनकी मौत की खबर से हर तरफ सनसनी मच गई। आश्चर्य की बात तो ये है कि दीनदयाल की मौत आज भी रहस्य बनी हुई है।

लगभग तीन दशकों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में उनके सहयोगी रहे नानाजी देशमुख ने 1971 में दीनदयाल उपाध्याय की 55वीं जयंती पर उपाध्याय की मृत्यु को लेकर बने रहस्य पर खेद व्यक्त किया था।

, भारतीय जनसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष उपाध्याय, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बन गए, उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए। देशमुख ने 1971 में नई दिल्ली में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “आज हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 55वीं जयंती मना रहे हैं, लेकिन हमारी आंखों में आंसू हैं।” न तो सीबीआई और न ही चंद्रचूड़ जांच आयोग यह बता सका कि आखिर दीनदयालजी की हत्या क्यों और किसने की।

उन्होंने कहा कि, ऐसा लगता है कि सरकार (तब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में), इस डर से कि इसके राजनीतिक परिणाम खराब होंगे, नहीं चाहती थी कि हत्यारे और उनके साथी पकड़े जाएं।