देवदत्त पटनायक ने कहा- सावरकर बीफ खाते थे, बिफरीं रवीना टंडन, पूछने लगीं- क्या आपने देखा था?

देवदत्त पटनायक ने कहा है कि सावरकर बीफ खाते थे। उनकी इस टिप्पणी पर रवीना टंडन ने उनसे पूछा है कि क्या उन्होंने सावरकर को ऐसा करते देखा था।

raveena tondon, devdutt pattanaik, vinaya damodar savarkar रवीना टंडन ने देवदत्त पटनायक को खरीखोटी सुनाई है (Photos-Indian Express/File)

अभिनेत्री रवीना टंडन ने लेखक और पौराणिक कथाकार देवदत्त पटनायक के सावरकर पर की गई एक टिप्पणी पर उन्हें खरीखोटी सुनाई है। हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर देवदत्त पटनायक ने कहा है कि वो बीफ खाते थे। उनकी इस टिप्पणी पर रवीना टंडन ने उनसे पूछा है कि क्या उन्होंने सावरकर को ऐसा करते देखा था।

दरअसल देवदत्त पटनायक ने एक यूजर को जवाब देते हुए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया था, ‘सावरकर बीफ खाते थे… क्या तुम खाते हो?’

देवदत्त पटनायक के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए रवीना टंडन ने लिखा, ‘क्या आप वहां थे? क्या आपने देखा था? क्या सबूत है? क्या आप अपना कुत्ता खाते हैं? गाय, बकरी, भैंस, सूअर की भावना और बुद्धि का स्तर समान ही होता है.. वो भी दर्द,अलगाव और यातना को महसूस करते हैं। देवदत्त पटनायक, शाकाहारी बनिए, सबको बनना चाहिए। ये हमें ग्लोबल वार्मिंग से भी बचाएगा।’

दरअसल इस विवादित चर्चा की शुरुआत तब हुई जब देवदत्त पटनायक ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व में अंतर बताते हुए एक ट्वीट किया। उनके ट्वीट के जवाब में अमोघ नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘इस आदमी को हिंदुत्व की समझ तक नहीं है। उदाहरण के लिए, इन्होंने हिंदुत्व की पढ़ा तक नहीं, सावरकर को भी नहीं। अगर पढ़ा होता तो उनके विचारों के विपरित जाकर ये ऐसा ट्वीट नही करते।’

यूजर के इस ट्वीट के जवाब में देवदत्त पटनायक ने सावरकर के बीफ खाने से जुड़ा ट्वीट किया और यूजर से पूछा था कि क्या वो बीफ खाते हैं। बहरहाल, रवीना टंडन ने देवदत्त पटनायक को जो जवाब दिया है, उस पर यूजर्स भी अपनी राय जाहिर कर रहे हैं।

 इजाज भगवान नाम के एक यूजर ने रवीना से पूछा, ‘आपका मतलब पेड़-पौधों में जान नहीं होती? डॉक्टर बॉस गलत थे जो उन्होंने ये साबित किया कि पौधों में भी भावना होती है। आपका तथ्य मैं समझ गया। प्रकृति अपने शाकाहारी और मांसाहारी प्रजातियों में संतुलन बना लेती है।’

विश्रुति सोनी नाम की एक यूजर ने लिखा, ‘स्टैंड लेने के लिए शुक्रिया मैम, हमें जरूरत ही क्यों है मांसाहार करने की? क्यों दूसरे जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाना।’ प्रशांत भाटिया नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘सही कहा रवीना जी आपने। मेरा कहना है कि अगर सावरकर के बीफ खाने के सबूत हैं भी तो उनका अनुसरण क्यों करना? उन्हें फॉलो करने की जरूरत ही क्या है? दयालुता एक सद्गुण है।’