देवेंद्र झाझरिया : पैरा ओलंपिक में तीसरी बार सोने की आस

देवेंद्र झाझरिया ने दो बार पैरालिंपिक में भाग लिया और दोनों ही बार उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है।

देवेंद्र झाझरिया! फाइल फोटो।

देवेंद्र झाझरिया ने दो बार पैरालिंपिक में भाग लिया और दोनों ही बार उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है। भारत के पहले पैरा ओलंपियन हैं झाझरिया, जिन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। देवेंद्र झाझरिया ने उम्र के साथ-साथ अनुभव भी हासिल किया है। जब वह 2004 में एथेंस ओलिंपिक में गए थे, तब उनकी उम्र 23 साल थी और अब वह 40 साल के हो गए हैं। इस उम्र में भी झाझरिया लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वह भारत के लिए तोक्यो में भाला फेंक स्पर्धा में पदक के मजबूत दावेदार हैं। वे तीसरी बार भी सोना पर निशाना साधने का इरादा रखते हैं।

वे कहते हैं कि न तो एथेंस आसान था और न ही रियो। तोक्यो भी आसान नहीं होगा। वे कहते हैं, ‘लेकिन कुछ साल में मेरी सोच में बदलाव आया है। यह बदलाव अनुभव और कामयाबी के साथ आता है। इस बात में कोई शक नहीं कि मैं काफी शांत हो गया हूं और मेरा प्रशिक्षण भी ठीक चल रही है।’ अपने प्रशिक्षण के लिए वे अपने कोच को काफी श्रेय देते हैं। वे कहते हैं, ‘मेरे कोच सुनील, स्ट्रैंथ एंड कंडीशनिंग कोच लक्ष्य बत्रा और फिजियोथेरेपिस्ट बिरेन शाह ने काफी मेहनत की और यह सुनिश्चित किया कि मैं तोक्यो के लिए क्वालिफाई करूं और पदक का दावेदार बना रहूं।’ वे कहते हैं कि कैंसर से जूझ रहे अपने पिता के लिए तोक्यो में स्वर्ण पदक जीतना चाहते हैं।

भारतीय एथलेटिक्स में देवेंद्र झाझरिया का चर्चित नाम है। वे भाला फेंक में चैंपियन हैं। उन्होंने 2016 में रियो में स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले 2004 में एथेंस में भी उन्होंने सोने का तमगा हासिल किया था। इस बीच के 12 साल में एफ-46 जैवलिन पैरालिंपिक का हिस्सा नहीं था। भारत के सर्वश्रेष्ठ पैरालिंपियन माने जाने वाले झाझरिया ने रियो में रेकॉर्ड 63.97 मीटर का भाला फेंका था। इसके बाद जुलाई 2021 में 65.71 मीटर भाला फेंककर उन्होंने तोक्यो के लिए क्वॉलिफाई किया था। वहीं एथेंस में उन्होंने 62.15 मीटर भाला फेंककर विश्व रेकॉर्ड बनाया था।

झाझरिया को 2021 में पद्मश्री दिया गया। वह यह सम्मान हासिल करने वाले पहले पैरा एथलीट हैं। इससे पहले उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड 2017 में और 2005 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। अपनी उम्र को देखते हुए इस बार के पैरा ओलंपिक को वे अपना आखिरी पैरालिंपिक मान रहे हैं। झाझरिया इसे यादगार बनाने का पूरा प्रयास करेंगे। वह भारत की ओर से पदक, खासकर स् पर्ण पदक के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।