दो तरह की नीलामी

आइपीएल में मुख्य रूप से दो तरह की नीलामी होती है। इसे छोटी और दूसरी बड़ी।

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इस बार छोटे पैमाने की नीलामी का आयोजन होना है। इसके तहत अंतिम सूची में शामिल कैप्ड, अनकैप्ड और ओवरसीज (विदेशी) खिलाड़ियों पर बोली लगेगी।

क्या है छोटे पैमाने की नीलामी?

आइपीएल के 13वें सत्र यानी 2020 में भी छोटी नीलामी का आयोजन किया गया था। उसमें 73 स्लॉट पर 332 खिलाड़ियों को चुनने के लिए आठ टीमों ने बोली लगाई थी। इसमें 29 विदेशी और 33 भारतीय खिलाड़ियों समेत 62 खिलाड़ियों को टीमों ने खरीदा था। इसके तहत फ्रेंचाइजी को टीम में बचे खिलाड़ियों के स्थान को भरने के लिए बोली लगानी होती है।

इसमें फ्रेंचाइजी के पास यह अधिकार है कि वह ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को रिटेन कर सके। बचे स्थान के लिए ही बोली में शामिल हुआ जाता है। खिलाड़ियों को बरकरार रखने यानी रिटेन की प्रक्रिया के बाद फ्रेंचाइजियों को एक तय समय में बाहर किए गए खिलाड़ियों की सूची आइपीएल गवर्निंग काउंसिल को सौंपनी होती है।

निकाले गए खिलाड़ियों की सैलरी कैप से आए रुपए और आइपीएल द्वारा जोड़े गए पैसों को मिलाकर फ्रेंचाइजी नए खिलाड़ियों के लिए बोली प्रक्रिया में शामिल होती है। इसके अलावा टीमों के पास ट्रांसफर विंडो (ट्रेड विंडो) का भी आॅप्शन होता है। इसके तहत खिलाड़ी दोनों टीमों की आपसी रजामंदी से फ्रेंचाइजी बदल सकते हैं। इसमें अनकैप्ड के साथ-साथ कैप्ड खिलाड़ी को भी टीमें ट्रेड कर सकती हैं।

बड़ी बोली क्या है?

2018 में मेगा आॅक्शन का आयोजन हुआ था। तब चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स स्पॉट फिक्शिंग मामले में दो साल का प्रतिबंध झेलने के बाद लीग में वापस आई थीं। इस बड़ी बोली में 182 स्लॉट के लिए 13 देशों के 578 खिलाड़ियों को चुनने के लिए आठ टीमों ने बोली लगाई थी। अगले दो साल में बीसीसीआइ के योजना के मुताबिक दो और टीमें इस लीग से जुड़ेंगी और ऐसे में अगला बड़े पैमाने पर नीलामी 2022 में होगी।

बड़ी नीलामी से पूर्व टीमों को ज्यादा से ज्यादा पांच खिलाड़ियों को बरकरार रखने की इजाजत होती है। बाकी खिलाड़ी नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। इन्हें कोई भी टीम खरीद सकती है। तीन खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी शुरुआती दौर में और दो को। नीलामी के दौरान राइट टू मैच कार्ड के माध्यम से रिटेन कर सकती है।

इसके अलावा फ्रेंचाइजी राइट टू मैच कार्ड का इस्तेमाल कर भी पिछले टीम में शामिल खिलाड़ियों को वापस ला सकती है। सभी फ्रेंचाइजी के पास दो कार्ड होते हैं। इसके साथ ही अगर शुरुआती राउंड में तीन में से दो रिटेन खिलाड़ी विदेशी होते हैं तो फ्रेंचाइजी राइट टू मैच कार्ड से किसी भी विदेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल नहीं कर सकती।