नरेंद्र मोदी का मंदिर बनवा BJP कार्यकर्ता ने लगवा दी मूर्ति, शीर्ष नेतृत्व हुआ खफा तो हटवाई प्रतिमा; NCP-शिवसेना ने घेरा

मुंडे ने कहा “मैं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का अनुयायी हूं और मैं उनकी पूजा करता हूं … और उनका आशीर्वाद लेता हूं। मंदिर अन्य अनुयायियों को भी उनका आशीर्वाद लेने में सक्षम करेगा।”

महाराष्ट्र के पुणे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कार्यकर्ता ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का एक मंदिर कुछ दिन पहले बनाया था लेकिन अब मंदिर से प्रधानमंत्री की आवक्ष प्रतिमा को हटा दिया गया है। मोदी का मदिर बनाए जाने से पार्टी शीर्ष नेतृत्व भी खुश नहीं था। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)और शिवसेना ने भी इसको लेकर निशाना साधा है।

मयूर मुंडे ने कुछ दिन पहले औंध इलाके में एक सड़क के किनारे एक छोटा सा मंदिर बनवाया था और उसमें मोदी की प्रतिमा स्थापित की थी। मुंडे ने कहा “मैं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का अनुयायी हूं और मैं उनकी पूजा करता हूं … और उनका आशीर्वाद लेता हूं। मंदिर अन्य अनुयायियों को भी उनका आशीर्वाद लेने में सक्षम करेगा।” मयूर मुंडे के इस कदम की न केवल विपक्षी दलों बल्कि स्थानीय भाजपा नेताओं से भी तीखी आलोचना की है। प्रतिमा हटाए जाने के बाद, राकांपा और शिवसेना दोनों ने इस अवसर का इस्तेमाल भाजपा पर कटाक्ष करने के लिए किया और कहा कि वे “निराश” हैं।

राकांपा के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को यहां औंध इलाके में प्रदर्शन किया। राकांपा की नगर इकाई के प्रमुख प्रशांत जगताप ने व्यंगात्मक लहजे में कहा, “शहर में आशावाद व्याप्त हो गई है कि (मोदी के लिए मंदिर निर्माण के बाद) अब ईंधन की कीमतों में कमी आएगी, महंगाई घटेगी और लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपये आएंगे। हम यहां आए हैं और देखा कि मंदिर से ‘भगवान’ गायब हैं।”

उन्होंने कहा कि ऐसे मंदिर का निर्माण “बौद्धिक दिवालियेपन” का प्रतीक है। 37 वर्षीय मुंडे ने पहले कहा था कि मंदिर प्रधानमंत्री को उनकी श्रद्धांजलि है जिन्होंने “अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया है।” मुंडे ने कहा था, “प्रधानमंत्री बनने के बाद, मोदी ने बहुत सारे विकास कार्य किए हैं और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, राम मंदिर निर्माण और तीन तलाक जैसे मुद्दों को सफलतापूर्वक निपटाया है।”

मुंडे ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री की आवक्ष प्रतिमा और निर्माण में प्रयुक्त लाल संगमरमर जयपुर से लाया गया था और कुल खर्च लगभग 1.6 लाख रुपये आया था। वहीं शिवसेना की नगर इकाई के नेताओं ने भी कहा कि वे मंदिर में पूजा करना चाहते हैं लेकिन इससे पहले प्रधानमंत्री की प्रतिमा को हटा दिया गया।

शिवसेना के एक नेता ने कहा, “मुद्रास्फीति अपने उच्चतम स्तर पर है और गरीबों के लिए मौजूदा स्थिति में जीवित रहना मुश्किल है। हम गरीबों की मदद के लिए प्रार्थना करना चाहते थे।”