नवजोत सिंह सिद्धू ने चारपाई के नीचे से घसीटकर की थी मनोज प्रभाकर की पिटाई, टीवी शो में बताई थी वजह

नवजोत सिंह सिद्धू ने रजत शर्मा से कहा, ‘मुर्गा अगर बांग नहीं देगा तो इसका मतलब यह नहीं कि सूर्यदेव उदय नहीं होंगे। तो वही मैंने उसको सबक सिखाया। वह लड़ाई हुई। सजा की बात भी आई। लोगों ने कहा कि सजा तुम्हें मिलेगी।’

Navjot Singh Sidhu Manoj Prabhakar Indian Cricketer Rajat Sharma

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू अपनी बेबाकी के लिए प्रसिद्ध हैं। राजनीति में कदम रखने के बाद वह कई बार विवादों में भी घिर चुके हैं। हालांकि, शायद ही लोगों को पता हो कि क्रिकेट करियर के दौरान उनकी कई बार अपने साथी क्रिकेटर्स से लड़ाइयों भी हो चुकी हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा के शो आप की अदालत में इस बात को स्वीकारा भी था। साथ ही अपनी सफाई भी पेश की थी।

रजत शर्मा ने शो की पंरपरा के मुताबिक पूर्व क्रिकेटर पर इलजाम लगाते हुए कहा, ‘मनोज प्रभाकर को आपने अलमारी में बंद कर दिया था और चाभी लेकर कहीं दूर चले गए थे?’ इस पर नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘बिल्कुल सही बात है। मनोज प्रभाकर को मैंने बंद नहीं किया था। वह डर इतना गया था कि चारपाई के नीचे घुस गया था। तो मैंने उसकी टांग पकड़कर बाहर खींचा था और उसकी धुनाई भी की थी। मैं इस बात को मानता हूं। लेकिन वह क्यों की थी, उसका कारण भी तो आप सोचिए कि क्या है?’

नवजोत सिंह सिद्धू ने आगे कहा, ‘क्या हुआ कि अजहरुद्दीन अपने कमरे में बैठे मूवी देख रहे थे। कपिल पाजी (कपिल देव) का कमरा उनके साथ था। मैंने वह पिक्चर देखी हुई थी, इसलिए मैंने कपिल पाजी को रिक्वेस्ट किया कि मैं दूसरी पिक्चर लेकर दूसरे कमरे में चला जाता हूं। दो-तीन आदमी और ले जाता हूं। मैंने जैसे ही फिल्म को हाथ लगाने लगा तो मनोज ने कहा, अबे ओए, रख इसको।’

नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘मैंने मन्नू (मनोज प्रभाकर) को देखा और कहा यार भईया मैं तेरा रामू नहीं हूं। आराम से बात कर यार। कमाल कर रहा है यार। तू क्या बात कर रहा है। मैंने फिर वह फिल्म उठाने की कोशिश की। वह फिर बोला- नहीं, नहीं रख दे इसको। तो मैंने रख दी। दो-3 मिनट और बैठ गया। मैंने कहा कि चलो कोई बात नहीं। मैं बर्दाश्त कर गया। मैंने सोचा बड़े भाई जैसा है।’

नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘वहां रसगुल्ले पड़े हुए थे। पिक्चर चल रही थी। मैंने इस बीच रसगुल्ला उठाने के लिए हाथ बढ़ाया। इस पर वह फिर बोला, अबे ओए। इस पर मैंने कहा- तू खरीद कर लाया है? कहता है नहीं। मैंने कहा पैसे तेरे लगे हैं? कहता नहीं। मैंने कहा- मैं रसगुल्ले लेकर आया हूं। तुम सबको खाने के लिए। तू मेरे ही रसगुल्ले मुझे ही खाने से इनकार कर रहा है।’

नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘मनोज प्रभाकर ने मुझसे कहा मेरी मर्जी। उसका इतना कहना था कि मैं फटाक दिया। खूब तगड़े से दिया। देखो आदमी घोड़े से गिरकर उठ सकता है, लेकिन अपनी नजरों में अगर गिर जाए तो फिर वह उठ नहीं सकता। अगर किसी ऐसे आदमी को जो समझता है कि बस मेरी ही आवाज में दम है।’

नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘मुर्गा अगर बांग नहीं देगा तो इसका मतलब यह नहीं कि सूर्यदेव उदय नहीं होंगे। तो वही मैंने उसको सबक सिखाया। वह लड़ाई हुई। सजा की बात भी आई। लोगों ने कहा कि सजा तुम्हें मिलेगी। इस्तकबाल करो अपनी गलती। मैंने कहा कि वह अगर अपनी गलती मानता है तो मैं अपनी गलती मानता हूं।’