नितिन गडकरी बोले, देश में अभी 50 एम्स की ज़रूरत, कोरोना काल में ऑक्सीजन की थी भारी कमी

शनिवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश को कम से कम 600 मेडिकल कॉलेजों, 50 एम्स जैसे संस्थानों और 200 सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की जरूरत है।

शनिवार को महाराष्ट्र में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान लोगों को ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ा। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने बहुत मदद की। (एक्सप्रेस फोटो)

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देशभर में ऑक्सीजन की किल्लत देखने को मिली थी. जिसकी वजह से कई कोरोना पीड़ितों को भयंकर समस्या का करना पड़ा था। कई रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि ऑक्सीजन की कमी से कई कोरोना मरीजों की मौत भी हुई है लेकिन केंद्र सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि देशभर में ऑक्सीजन की कमी से किसी की भी मौत नहीं हुई है। लेकिन अब केंद्र सरकार में मंत्री नितिन गडकरी ने भी माना है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की भारी कमी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में अभी भी 50 एम्स की जरूरत है।

महाराष्ट्र के सतारा जिले के कराड शहर में कोरोना योद्धाओं के लिए आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश को कम से कम 600 मेडिकल कॉलेजों, 50 एम्स जैसे संस्थानों और 200 सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सड़क निर्माण की तरह पब्लिक- प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाने की जरूरत है।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि एक बार प्रधानमंत्री मोदी के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने वेंटिलेटर की कमी का मुद्दा उठाया। जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे देश में मौजूद वेंटिलेटर की संख्या बताने के लिए कहा। प्रधानमंत्री मोदी के सवाल का जवाब देने के लिए नितिन गडकरी ने अंदाजा लगाते हुए कहा कि देशभर में करीब 2.5 लाख वेंटिलेटर होना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा कि जब कोरोना महामारी फैली थी तो देशभर में सिर्फ 13000 वेंटिलेटर थे।

आगे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान लोगों को ऑक्सीजन, अस्पताल में बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ा। लेकिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने उस समय बहुत मदद की। साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान सरकारी अस्पतालों के अलावा को- ऑपरेटिव और प्राइवेट अस्पतालों ने भी अच्छा काम किया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में काम रहे सामाजिक संगठनों को भी सहायता देने पर भी विचार कर रही है।