नेपाल में राजनीतिक ड्रामे के बीच ओली फिर बने पीएम, बहुमत जुटाने में फेल रहा विपक्ष

केपी शर्मा ओली फिर बने नेपाल के पीएम. (File pic)

केपी शर्मा ओली फिर बने नेपाल के पीएम. (File pic)

KP Sharma Oli Reappointed Nepal PM: विपक्षी दल नई सरकार बनाने के लिए सदन में आवश्यक बहुमत जुटाने में असफल रहे, जिसके बाद ओली के प्रधानमंत्री पद पर दोबारा काबिज होने का रास्ता साफ हो गया.

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नई दिल्ली. केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने एक बार फिर से नेपाल के प्रधानमंत्री पद की कमान संभाल ली है. दरअसल पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाली सीपीएन (माओवादी सेंटर) द्वारा बुधवार को सरकार से आधिकारिक रूप से समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत खो दिया था, लेकिन गुरुवार को विपक्षी दल नई सरकार बनाने के लिए सदन में आवश्यक बहुमत जुटाने में असफल रहे, जिसके बाद ओली के प्रधानमंत्री पद पर दोबारा काबिज होने का रास्ता साफ हो गया.
ओली के विश्वास मत खोने के बाद राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने बृहस्पतिवार रात तक सरकार गठन की समयसीमा तय की थी, लेकिन नेपाल के राजनीतिक दल अपने धड़ों के बीच गुटबाजी के चलते कोई सहमति नहीं बना पाए. इससे पहले शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद के लिये दावा पेश करने का निर्णय लिया था, लेकिन गठबंधन सरकार बनाने की उसकी कोशिशों को तब झटका लगा जब महंत ठाकुर की अगुवाई वाली जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल (जेएसपी-एन) के एक वर्ग ने साफ कर दिया कि वह सरकार गठन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेगा.
ठाकुर के नेतृत्व वाले धड़े के प्रतिनिधि सभा में करीब 16 मत हैं. नेपाली कांग्रेस के पास 61 मत हैं. उसे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी मध्य) का समर्थन हासिल है, जिसके पास 49 मत हैं. कांग्रेस-माओवादी मध्य के गठबंधन को उपेन्द्र यादव नीत जनता समाजवादी पार्टी के करीब 15 सांसदों का भी समर्थन हासिल है. लेकिन इन तीनों दलों के पास कुल 125 मत हैं जो 271 सदस्यीय सदन में बहुमत के आंकड़े 136 से 11 मत कम हैं.

सीपीएन-यूएमएल के माधव कुमार नेपाल-झालानाथ खनल धड़े से संबंध रखने वाले सांसद भीम बहादुर रावल ने गतिरोध खत्म करने के लिये मंगलवार को दोनों नेताओं के करीबी सांसदों से नयी सरकार का गठन करने के लिये संसद सदस्यता से इस्तीफा देने का आग्रह किया था. रावल ने बुधवार को ट्वीट किया कि ओली नीत सरकार को गिराने के लिये उन्हें संसद सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिये.
उन्होंने लिखा, ”असाधारण समस्याओं के समाधान के लिये असाधारण कदम उठाए जाने की जरूरत होती है. प्रधानमंत्री ओली को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ अतिरिक्त कदम उठाने से रोकने के लिये उनकी सरकार गिराना जरूरी है. इसके लिये हमें संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिये. राजनीतिक नैतिकता और कानूनी सिद्धांतों के लिहाज से ऐसा करना उचित है.”
यदि नेपाल-खनल धड़े के यूएमएल के 28 सांसद एक साथ संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे देते हैं तो नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-माओवाद मध्य के लिये जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल (जेएसपी-एन) के एक धड़े के सांसदों का समर्थन लिये बिना भी नयी सरकार के गठन की राह आसान हो जाती.

यदि यूएमएल के 28 सांसद सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देते हैं तो 271 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में सांसदों की संख्या घटकर 243 हो जाती और बहुमत का आंकड़ा भी कम हो जाता. इसके बाद नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-माओवाद मध्य गठबंधन आसानी से सरकार बना सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.