नोएडा: कोविड पॉज़िटिव मरीज को अस्पताल ने बता दिया भगोड़ा, बाद में मॉर्चरी में मिली लाश

अस्पताल का कुतर्कः आइसोलेशन वार्ड से आइसीयू में शिफ्ट करते वक्त वह बेहोशी में था। मरा तो उसे लावारिस मान लिया। उधर, आइसोलेशन वॉर्ड की नर्स ने बेड खाली देखा तो मरीज को भगोड़ा करार दे दिया

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अस्पताल कई दिनों से कह रहा था कि मरीज भाग गया। फिर, जब मरीज के घर वालों ने सख्ती की तो उनको अस्पतला की मॉर्चरी में ले जाया गया। उनका मरीज वहीं पड़ा था। ठंडा। और मुर्दा।

लापरवाही का यह पहाड़ चढ़ा गया नोएडा के जिम्स अस्पताल में। मरीज का नाम महेश था। 47 साल के यह आदमी 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुआ था। अस्पताल कहता है कि मरीज को पहले आइसोलेशन वॉर्ड में एड्मिट किया गया था। बाद में उसकी हालत जब खराब हुई तो उसको आइसीयू में डाला गया। वहीं उसकी मौत हो गई। इसके आगे क्या हुआ, यह बात बताने के लिए अस्पताल की ओर से नई कहानी गढ़ ली गई है।

तो उसे भागा हुआ क्यों करार दे दिया गयाः इसके लिए अस्पताल की थ्योरी यह है। आइसोलेशन वॉर्ड से जब आइसीयू में उसे लाया गया तो बेहोशी की हालत के कारण उसका नाम पता नहीं लिया जा सका। और, जब उसकी मौत हुई तो शरीर को लावारिस के रूप में मुर्दाघर में डाल दिया गया। उधर, आइसोलेशन वॉर्ड की नर्स ने जब देखा कि मरीज गायब है तो उसने उसको भागा हुआ माना और यही जानकारी आधिकारिक हो गई।

लेकिन क्या ऐसा संभव हैः जब मरीज को आइसोलेशन वॉर्ड में रखा गया होगा तो बेड पर उसकी फाइल भी तो बना कर रखी गई होगी, जिसमें मरीज के बारे में सूचनाएं होंगी। बताया जाता है कि फाइल में सारी सूचनाएं थीं। दरअसल, महेश को नोडल अधिकारी की अनुशंसा पर दाखिला दिया गया था। बताया जाता है कि फाइल में उसका मोबाइल और आधार आदि चीजें भी दर्ज हैं।

अस्पताल के पास इन सवालों के जवाब नहीं हैं। वह बस इतना बताता है कि मरीज की मौत 25 अप्रैल को हो गई थी।