पंजाब: कैप्टन के ही सिपाहियों ने की बगावत, नवजोत सिंह सिद्धू ने दी हवा और चला गया अमरिंदर सिंह का ताज

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के पीछे उनके ही कुछ सिपाहियों के नाम हैं जिनको कैप्टन ने अपनी सरकार में मंत्री के लिए चुना था। लेकिन उनकी बगावत की आग में पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने कुछ ऐसी हवा दी कि कैप्टन ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया।

Captain Amrinder Singh पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)। Source – Indian Express

पंजाब कांग्रेस में चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले ही सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे पीछे उनके ही सिपाहियों का अहम रोल माना जा रहा है। जिसमें उनकी ही सरकार के मंत्रियों की तिकड़ी, जिनमें तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखबिंदर सिंह सरकारिया शामिल हैं। कैप्टन का विरोध करने वाली इस टीम में चरणजीत सिंह चन्नी को छोड़ दें तो बाकी तीनों को कैप्टन ने ही अपने मंत्रिमंडल के लिए चुना था। इनकी बगावत की आग में नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा दी गई हवा, इस कदर काम कर गई, कि शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देना पड़ा।

बता दें कि कैप्टन सरकार से नाराज चल रहे इन चार बागी मंत्रियों ने 25 अगस्त को देहरादून में पार्टी प्रभारी हरीश रावत से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अमरिंदर सिंह को लेकर आरोप लगाया था कि वो विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल के साथ कोई गुप्त योजना बना रहे हैं। बागी मंत्रियों ने अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाया था कि वे गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों और इसको लेकर विरोध करने वाले दो लोगों की मौत के दोषियों को गिरफ्तार करने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि 2017 के चुनाव से पहले पंजाब से नशीली दवाओं के खात्मे को लेकर कैप्टन ने जो वादा किया था वो पूरा नहीं हो सका। कांग्रेस के बागी नेताओं ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले इस हाल में मतदाताओं के पास जाना मुश्किल है, क्योंकि कांग्रेस सरकार जनता से किए गए अपने प्रमुख वादों को पूरा नहीं कर सकी है।

कैप्टन के खिलाफ विद्रोह करने वाले इन नेताओं के बारे में एक नजर:

सुखजिंदर सिंह रंधावा: पूर्व राज्य कांग्रेस प्रमुख संतोख सिंह रंधावा के बेटे और गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के विधायक रहे सुखजिंदर सिंह रंधावा कैप्टन के खिलाफ बगावत करने वाले मंत्री दल में शामिल रहे। पंजाब में कांग्रेस सरकार के गठन के एक साल बाद 2018 में रंधावा को कैप्टन सरकार में जेल और सहकारिता मंत्री का पद दिया गया था। रंधावा, हाल के दिनों में, अमरिंदर के खिलाफ यह कहते हुए बहुत मुखर रहे कि चुनाव से पहले किए गए वादों के पूरा न होने के चलते 2022 का चुनाव लड़ना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि बेअदबी के मामलों में न्याय में देरी होने को लेकर कांग्रेस सरकार खुद जिम्मेदार है।

तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा: बाजवा गुरदासपुर जिले के फतेहगढ़ चुरियन विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्हें कैप्टन सरकार में ग्रामीण विकास और पंचायत, पशुपालन और मत्स्य पालन, डेयरी विकास और उच्च शिक्षा का प्रभार दिया गया था। चार बार विधायक रहे बाजवा ने PPCC महासचिव परगट सिंह के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान का नेतृत्व किया था और पार्टी आलाकमान से मांग की थी कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक की हो। इस मांग को लेकर 40 से अधिक विधायकों ने हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में शनिवार को पार्टी आलाकमान ने सीएलपी की बैठक बुलाई थी। हालांकि बैठक से पहले ही अमरिंदर सिंह ने अपना इस्तीफा दे दिया।

सुखबिंदर सिंह सरकारिया: विधानसभा चुनावों में अपनी लगातार तीसरी जीत हासिल करने वाले सरकारिया को अप्रैल 2018 में कैप्टन सरकार के विस्तार के दौरान पंजाब मंत्रिमंडल में शामिल कर जल संसाधन, खान और भूविज्ञान, आवास और शहरी विकास प्रभार दिया गया था। सरकारिया उन कांग्रेस नेताओं में शामिल थे जो पिछले महीने अमरिंदर के मुख्यमंत्री के काम पर नाराजगी जताने के लिए प्रदेश प्रभारी हरीश रावत से मिलने पहुंचे थे। सकारिया अमृतसर के राजा सांसी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

चरणजीत सिंह चन्नी: तीसरी बार विधायक बने चन्नी पंजाब की पिछली SAD-BJP सरकार के दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। चमकौर साहिब से विधायक चन्नी को कैबिनेट में तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण, रोजगार सृजन और प्रशिक्षण, और पर्यटन और संस्कृति मामलों के विभागों को सौंपा गया था। उन्होंने कैप्टन पर आरोप लगाया था कि वे पार्टी नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ध्यान नहीं देते। चन्नी भी पिछले महीने देहरादून में रावत से मिलने गए लोगों में शामिल थे।