पड़ोस के घर में जाकर बैठें क्या? SC की टिप्पणी पर राकेश टिकैत का जवाब, बोले- रास्ता दिल्ली पुलिस ने रोका है

राकेश टिकैत ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कहा कि हम कहां पर बैठें, वह सड़क हमने नहीं दिल्ली पुलिस ने ब्लॉक की हुई है।

rakesh tikait, asaduddin owaisi, yogi adityanath किसान नेता राकेश टिकैत (Photo-PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार एक किसान संगठन को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की मांग लिए फटकार लगाई और कहा कि आपने शहर का गला घोंट दिया है और अब आप लोग शहर के अंदर घुसना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को लेकर आगे कहा कि आप सुरक्षा और रक्षा कर्मियों को भी बाधित कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की बातों को लेकर अब राकेश टिकैत ने एनडीटीवी इंडिया को इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सड़कें हमने नहीं, दिल्ली पुलिस ने रोकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए रिपोर्टर ने किसान नेता राकेश टिकैत से सवाल किया, “सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो कहा गया, आपको नहीं लगता कि वह आपके लिए भी संकेत है, क्योंकि रास्ते इतने दिनों से बंद हैं और लोगों को भी परेशानी हो रही है।” इसका जवाब देते हुए राकेश टिकैत ने कहा, “हम तो नहीं बैठे। सड़क तो चलने के लिए होती है।”

राकेश टिकैत ने अपने बयान में आगे कहा, “कहां बैठें हम? सड़क चलने के लिए होती है और किसी ने हमारा रास्ता रोक दिया है तो हम कहां पर बैठें। किसी के पड़ोस के घर में बैठें क्या? रास्ता किसने रोका है, बैरिकेटिंग किसने की है। दिल्ली पुलिस ने रोका हुआ है हमारा रास्ता। हमने कहां रोका हुआ है?”

किसान नेता की बात पर रिपोर्टर ने पूछा, “लेकिन अगर सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाए तो?” इसका जवाब देते हुए राकेश टिकैत ने कहा, “सड़क चलने के लिए है।” किसान नेता ने रिपोर्टर से सवाल करते हुए कहा, “कानून किसने बनाए, सरकार ने और वह कहां रहती है? संसद में ना। हमारे जो पूर्वज हैं वह 35 सालों पहले संसद ही गए थे।”

राकेश टिकैत ने संसद का जिक्र करते हुए कहा, “संसद भवन और इंडिया गेट के बीच बड़े-बड़े पार्क बने हुए हैं, तो क्यों हमें परेशान कर रहे हैं और क्यों दिल्ली को परेशान कर रहे हैं। हमें वहां पर बैठ जाने दें, हमारी वहीं पर ही सरकार से बात हो जाएगी।” बता दें कि किसानों के प्रदर्शन पर जस्टिस एएम खानविल्कर का कहना था, “एक बार जब आप अदालत में कानूनों को चुनौती देते हैं तो विरोध करने का कोई मतलब नहीं है।”