पत्रकार ने पूछा- अखिलेश को दिल से माफ कर दिया? शिवपाल बोले- चार साल से ठीक से नहीं हुई बात

शिवपाल यादव से जब सवाल पूछा गया कि क्या उन्होंने दिल से अखिलेश को माफ कर दिया है। इसपर शिवपाल ने जवाब दिया कि उनके बीच पिछले चार साल से कोई बात ही नहीं हुई है।

शिवपाल यादव और अखिलेश यादव। तस्वीर 2016 की है। एक्सप्रेस आर्काइव

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब है और अखिलेश यादव कह चुके हैं कि वह छोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे। वहीं अब तक यह भी नहीं स्पष्ट हो पाया है कि वह अपने चाचा शिवपाल की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को अपने साथ ला पाएंगे या नहीं। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले जब समाजवादी पार्टी में उथल-पुथल हुई और अखिलेश यादव ने खुद को पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया, तभी से उनके और चाचा शिवपाल के रास्ते अलग हो गए थे।

अब एबीपी न्यूज के शिखर सम्मेलन कार्यक्रम में जब पत्रकार ने शिवपाल से इसपर सवाल पूछ लिया तो उन्होंने कहा कि वह तो चाहते हैं कि अखिलेश बात करें लेकिन पिछले चार साल से उनके बीच कोई बात नहीं हुई है। शिवपाल ने कहा, अगर चाचा-भतीजे की बात है तो बड़े के साथ छोटों को होना चाहिए। पत्रकार ने पूछा, किया आपने दिल से अखिलेश को माफ कर दिया है? शिवपाल ने जवाब दिया- सामजवादी पार्टी में मैंने काम किया है, संघर्ष किया है। चार साल हो गए हैं मुझे अभी तक उनसे बात करने का समय नहीं मिला। हां एक बार टेलीफोन पर बात हुई थी।

पत्रकार ने कहा, मैंने तो आपको सैफई के एक शादी समारोह में साथ खड़े देखा। शिवपाल ने कहा, बात तो कमरे में होती है, बैठकर होती है, शादी समारोह में कोई बात नहीं होती है। उन्होंने कहा, मैं आपके माध्यम से भी समय मांगता हूं कि बात कर लो। वहीं मुलायम सिंह यादव से बात करने पर पत्रकार ने सवाल पूछा तो शिवपाल ने कहा, नेताजी से बात होती है, उनके और मेरे घर की दीवार और दिल मिले हुए हैं।

शिवपाल ने इस कार्यक्रम में यह भी कहा कि मुलायम सिंह यादव के आदेश पर ही उन्होंने नई पार्टी बनाई है। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि नेताजी के आदेश और गवाहों के कहने पर नई पार्टी बनी थी।

इसी बीच प्रोफेसर रामगोपाल यादव से रार पर शिवपाल ने बताया कि उन्होंने फिरोजाबाद में चुनाव क्यों लड़ा। उन्होंने बताया कि रामगोपाल ने एक बार कह दिया था कि ऐसी पार्टी तो बनती रहती हैं। 500 वोट नहीं मिलेंगे तो नहीं सही। इसी वजह से दिखाने के लिए कि 500 वोट क्या होते हैं, हम चुनाव लड़ गए।