पश्चिम बंगालः अपने एक्टिंग चीफ जस्टिस के मामले में HC का सुनवाई से इनकार, कहा- फैसलों की आलोचना गलत नहीं

अदालत ने कहा कि “बार और बेंच न्यायिक प्रणाली के दो स्तंभ हैं” स्वस्थ तरीके से किसी निर्णय की निष्पक्ष और वैध आलोचना का हमेशा स्वागत है।हालांकि, अगर यह किसी वास्तविक कारण पर हो बिना किसी आधार के किसी मकसद और द्वेष के उद्देश्य से अगर ऐसा किया जाता है तो ऐसे गलत व्यक्ति के साथ मजबूती के साथ निपटा जाए।

कलकत्ता उच्च न्यायालय। (indian express photo)

कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को हटाने की मांग तेज हो गयी है। गुरुवार को कोलकाता हाईकोर्ट ने बार कॉउंसिल द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण को लिखे गए पत्र को गलत नहीं बताते हुए कहा कि फैसलों की आलोचना गलत नहीं है।

अदालत ने कहा कि “बार और बेंच न्यायिक प्रणाली के दो स्तंभ हैं” स्वस्थ तरीके से किसी निर्णय की निष्पक्ष और वैध आलोचना का हमेशा स्वागत है।हालांकि, अगर यह किसी वास्तविक कारण पर हो बिना किसी आधार के किसी मकसद और द्वेष के उद्देश्य से अगर ऐसा किया जाता है तो ऐसे गलत व्यक्ति के साथ मजबूती के साथ निपटा जाए।

क्या है पूरा मामला: पिछले महीने 17 मई को सीबीआई ने नारद स्टिंग कांड में तृणमूल कांग्रेस के दो मंत्री एक विधायक और एक पूर्व विधायक को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद सभी को निचली अदालत से जमानत मिल गयी थी। सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सुरक्षित रख लिया। इसके अलावा बार काउंसिल ने नंदीग्राम की चुनाव याचिका में भी न्यायामूर्ति बिंदल की भूमिका पर सवाल उठाया। बार काउंसिल की माने तो नंदीग्राम में ममता बनर्जी की हार के बाद हाईकोर्ट में दायर याचिका में जस्टिस बिंदल ने दिलचस्पी दिखायी थी।

बताते चलें कि कलकत्ता उच्च न्यायालय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने शुक्रवार को पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को शपथ दिलायी। इन न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों स्वीकृत संख्या 72 है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने दिन के दौरान पांच न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति केसांग डोमा भूटिया, न्यायमूर्ति रवींद्रनाथ सामंत, न्यायमूर्ति सुगतो मजूमदार, न्यायमूर्ति बिवास पटनायक और न्यायमूर्ति आनंद कुमार मुखर्जी को पद की शपथ दिलायी। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा उनकी नियुक्ति को अधिसूचित किया था।