पहला चुनाव हारने के बाद विजयाराजे ने बेटी वसुंधरा राजे को भेज दिया था ससुराल, बीजेपी के इस नेता ने दी थी राजमाता को सलाह

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पहले चुनाव राजस्थान की भिण्ड सीट से लड़ा था। इस चुनाव में वसुंधरा की करारी हार हुई थी और उन्हें वापस ससुराल भेज दिया गया था।

BJP leader, Vasundhara Raje, Scindia Family राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे (Express archive photo)

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने साल 1984 में पहला चुनाव लड़ा था। इस दौरान उनकी मां विजयाराजे सिंधिया बीजेपी की बड़ी नेता थीं। वसुंधरा राजे ने पहला चुनाव मध्य प्रदेश के भिण्ड से लड़ा था। दरअसल इस दौरान वसुंधरा राजे राजस्थान नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में थीं क्योंकि अपने पति और धौलपुर के महाराज हेमंत सिंह से वह अलग हो चुकी थीं।

‘द लल्लनटॉप’ के मुताबिक, वसुंधरा राजे ने साल 1984 में भिण्ड से चुनाव तो लड़ा लेकिन कांग्रेस की लहर का खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ा। कांग्रेस के उम्मीदवार कृष्ण सिंह की शानदार जीत हुई और वसुंधरा राजे की करीब 87 हजार वोटों से हार हुई। वसुंधरा की खराब शुरुआत के बाद राजमाता विजयाराजे सिंधिया काफी चिंतित हो गई थीं और उन्होंने तत्कालीन राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष भैरों सिंह शेखावत से इसका जिक्र किया।

शेखावत ने विजयाराजे सिंधिया को सलाह दी कि वसुंधरा को दोबारा ससुराल भेज दो। राजमाता को उनकी बात समझ आई और वसुंधरा को वापस धौलपुर भेज दिया गया। साल 1985 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा। वसुंधरा राजे ने इस चुनाव में कांग्रेस के भंवर लाल को करारी शिकस्त दी। इसी के साथ वसुंधरा राजे का राजनीतिक करियर भी शुरू हो गया और उन्होंने भैरों सिंह शेखावत को अपना राजनीतिक गुरु बना लिया।

भैरों सिंह शेखावत ने वसुंधरा राजे को बीजेपी के युवा मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया। साल 1989 में एक बार फिर आम चुनाव आए और राजस्थान के झालावाड़ सीट से वसुंधरा राजे मैदान में आईं। बेटी के लिए प्रचार करने के लिए विजयाराजे सिंधिया भी सामने आईं। नतीजा भी साफ हो गया और वसुंधरा राजे 1 लाख 46 हजार 541 मतों से जीत गईं। इसके बाद उन्होंने इसी सीट से लगातार जीत हासिल की और अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री तक बनाईं गईं।

वसुंधरा राजे की लंबी लड़ाई: भले ही वसुंधरा राजे का राजनीति में कद बढ़ता चला गया हो, लेकिन उन्हें अपने बेटे दुष्यंत सिंह के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी। तलाक के बाद वसुंधरा ने ग्वालियर में बेटे दुष्यंत सिंह को जन्म दिया था। उन्होंने बेटे को उनका हक दिलवाने के लिए लंबी कानून लड़ाई भी लड़ी थी। साल 2007 में दुष्यंत को धौलपुर का महल समेत कई संपत्तियां मिल गई थीं। अब दुष्यंत सिंह भी बीजेपी के बड़े नेता हैं और झालावाड़ सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर 2019 में लोकसभा पहुंचे थे।