‘पापा ने बनाया क्रिकेटर, खेलता नहीं तो किसी का घर बनाता’, इंटरव्यू में अक्षर पटेल ने सुनाई थी अपनी कहानी

अक्षर पटेल ने 2 टेस्ट मैचों में 18 विकेट लिए हैं। इस दौरान 3 बार पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट अपने नाम किया है। उनकी इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ पिता राजेश पटेल का है।

Axar Patel

भारतीय क्रिकेट टीम के स्पिनर अक्षर पटेल इन दिनों सुर्खियों में हैं। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज के दूसरे और तीसरे टेस्ट में घातक गेंदबाजी की है। पटेल ने 2 टेस्ट मैचों में 18 विकेट लिए हैं। इस दौरान 3 बार पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट अपने नाम किया है। उनकी इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ पिता राजेश पटेल का है। उन्होंने ही अक्षर को क्रिकेटर बनाया है। इस बारे में भारतीय स्पिनर ने एक इंटरव्यू में विस्तार से बताया था।

अक्षर ने दिल्ली कैपिटल्स यूट्यूब चैनल के कार्यक्रम डीसी कैफे में कहा था, ‘‘पिताजी ने मेरी पिटाई ज्यादा नहीं की है। सिर्फ दो बार पिटाई लगी है। 26 साल में अगर सिर्फ दो पिटाई लगी है तो यह कोई ज्यादा नहीं है। आप अगर छोटे होते हो तो कोई न कोई शरारत तो करते ही हो। इसलिए यह तो काफी कम है। उनको (पिताजी) इसलिए अपना सबसे पसंदीदा आदमी बताता हूं कि अभी जहां हूं उनकी बदौलत हूं। अगर उन्होंने मुझे आगे नहीं बढ़ाया होता तो मैं अभी किसी का घर बना रहा होता।’’

अक्षर ने आगे कहा था, ‘‘मैं आज किसी बिल्डिंग बना रहा होता या बुर्ज खलीफा की दूसरी डिजाइन तैयार कर रहा होता। मैं इंजीनियर लाइन में होता। उन्होंने मुझे कहा कि नहीं, तू क्रिकेट खेलेगा। अच्छा खेल सकता है। सबके मम्मी-पापा बच्चे को मना करते हैं और मुझे कहते थे कि तू खेल और पढ़ाई पर मत ध्यान दे।’’ अक्षर को इसके अलावा अपने कुत्ते गूची पटेल से भी काफी प्यार है। इस बारे में उन्होंने कहा, ‘‘मैं पहले कुत्तों से डरता था। सामने से कुत्ते को देख लेने के बाद उल्टा घूम जाता था।’’

अक्षर ने बताया, ‘‘मेरे दोस्तों के घर पर कुत्ते थे तो मैं बाहर से ही उनसे मिल लेता था। एक बार पिताजी का एक्सीडेंट हुआ था। उन्हें ब्रेन हैम्ब्रेज हुआ था। ब्रेन में चोट लगने के बाद आदमी पहले जैसा नहीं हो पाता है। वो 80 प्रतिशत तक ठीक हो गए थे। इतना बड़ा एक्सीडेंट होने के बाद भी वो खुद से अपना काम करने लगे थे। मैंने उन्हें घूमने के लिए बहन के पास कनाडा भेजा था। मेरे अंकल के घर पर एक कुत्ता था। 25 दिन में उससे उनका काफी लगाव हो गया था। पिताजी कुत्ते के साथ बहुत खुश थे। तभी मैंने सोचा कि वो भारत आएंगे तो मैं उनके लिए कुत्ता खरीद लूंगा। जब वो आया तो मैं दो दिन में उससे घुल-मिल गया।’’