पिता की बताई एक बात अब तक नहीं भूली हैं मायावती, CM बनने के बाद कुछ ऐसा था अनुभव

यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने बताया था कि उन्होंने पिता की कही एक बात के बाद अपने जीवन का लक्ष्य पूरी तरह बदल लिया था और बहुजन समाज के लिए काम करने का फैसला किया था।

mayawati,BSP, UP Election बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Photo- Indian Express)

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह राजनीति में आएंगी। मायावती UPSC की तैयारी कर रही थीं और IAS अधिकारी बनना चाहती थीं। लेकिन कांशीराम की कही एक बात से उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बदल लिया था। बसपा सुप्रीमो ने बताया था कि उनके जीवन पर पिता का भी बहुत गहरा प्रभाव रहा है। पिता की कही एक बात के बाद एक और फैसला ले लिया था।

मायावती ने ‘एपीएन न्यूज़’ से बात करते हुए बताया था, ‘मैंने भी नहीं सोचा था कि मैं राजनीति में आऊंगी। छात्र होते हुए मैं गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाया करती थी। वहां मैंने देखा कि हर जाति के मोहल्ले अलग-अलग हैं। मैंने अपने पिता से पूछा कि लोग अलग-अलग क्यों रहते हैं? और हमारी बस्ती में दूसरी जाति के लोग आना पसंद क्यों नहीं करते हैं? मेरे पिता ने वर्ण व्यवस्था के बारे में मुझे जानकारी दी और उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के बारे में भी मुझे बताया।’

मेहनत पर था मायावती को भरोसा: बीएसपी सुप्रीमो आगे बताती हैं, ‘मैंने पिता के कहने के बाद बाबा साहेब के बारे में पढ़ा और फैसला किया कि इस अंतर को मुझे खत्म करना है। मैं शुरुआत से ही ये सोचती हूं कि कोई भी काम कठिन नहीं है। मैं बचपन से बहुत जिद्दी रही हूं। किसी भी क्षेत्र में मैंने कदम रखा तो कामयाबी हासिल करने के बाद ही रुकी। मुझे अपनी मेहनत के ऊपर बहुत भरोसा था। बाबा साहेब कहते थे कि अगर कुछ करना है तो राजनीति की मास्टर की (मास्टर चाबी) बहुजन समाज को अपने हाथ में लेनी होगी।’

अपने जीवन के सबसे अच्छे अनुभव के बारे में बताते हुए मायावती कहती हैं, ‘जब मुझे यूपी का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला तो सबसे अच्छा अनुभव वही था मेरे जीवन का। क्योंकि सीएम पद की शपथ लेने के बाद मुझे ऐसा लगा कि मैंने बाबा साहेब का सपना पूरा कर लिया है। मैंने 6 महीने में 6 साल से ज्यादा काम करके दिखाया था।’

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के साथ एक इंटरव्यू में मायावती ने बताया था, ‘सीएम बनने के बाद मैंने महसूस किया कि सभी IAS-IPS ऑफिस पहुंच गए थे और वह मेरे आदेश का इंतजार करने लगे थे। अगर मैं राजनीति में नहीं आती तो मुझे भी किसी अन्य नेता के आदेश का ही पालन करना पड़ता। लेकिन सीएम बनने के बाद मैं अपने समाज के लिए काम कर पाई।’