पीएम मोदी के अलावा अनुप्रिया पटेल लगाया है पोस्‍ट ऑफ‍िस की इस स्‍कीम में रुपया, एफडी से ज्‍यादा मिलता है रिटर्न

नेशनल सेविंग सर्टिफ‍िकेट (एनएससी) भारत सरकार की एक गारंटीड इनकम इंवेस्‍टमेंट स्‍कीम है, जिसे आप किसी भी पोस्‍ट ऑफ‍िस ब्रांच में खोल सकते हैं। यह एक सेविंग बांड है जो ग्राहकों को मुख्य रूप से छोटे से मध्यम आय वाले निवेशकों को टैक्‍स सेव करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित करता है।

Anupriya Patel, Pm Modi पीएम नरेंद्र मोदी और अनुप्रिया पटेल दोनों नेशनल सेविंग सर्टिफि‍केट में निवेश किया हुआ है। (Photo By Indian Express Archive)

पोस्‍ट ऑफ‍िस स्‍कीम देश की आम जनता की पॉकेट के हिसाब से तैयार की गई हैं, लेकिन इनमें देश के खास लोगों ने भी निवेश किया हुआ है। यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री ने भी पोस्‍ट ऑफ‍िस की स्‍कीम में निवेश कर रखा है। जिसका नाम नेशनल सेविंग सर्टिफ‍िकेट है। वहीं इस स्‍कीम में अपना दल की प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल भी निवेश किया हुआ है।

जहां पीएम मोदी ने एनएससी में 8 लाख से ज्‍यादा का निवेश किया हुआ है, वहीं अनुप्रिया पटेल इस योजना में 1.59 लाख रुपए का ही निवेश किया है। इस बात की जानकारी उनके 2019 के चुनावी एफिडेविट से मिली है। अगर नेशनल सेविंग सर्टिफि‍केट की खासि‍यत के बारे में बताएं तो इसमें आपको फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट से ज्‍यादा ब्‍याज मिलता है। अगर आप भी पीएम मोदी और अनुप्रिया पटेल की तरह सेफ और गारंटीड रिटर्न वाली योजना में निवेश करना चाहते हैं तो पहले इस योजना के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लीजिए।

नेशनल सेविंग सर्टिफ‍िकेट क्या है?
नेशनल सेविंग सर्टिफ‍िकेट (एनएससी) भारत सरकार की एक गारंटीड इनकम इंवेस्‍टमेंट स्‍कीम है, जिसे आप किसी भी पोस्‍ट ऑफ‍िस ब्रांच में खोल सकते हैं। यह एक सेविंग बांड है जो ग्राहकों को मुख्य रूप से छोटे से मध्यम आय वाले निवेशकों को टैक्‍स सेव करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित करता है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड और पोस्ट ऑफिस एफडी जैसे स्‍कीम की तरह यह भी गारंटीड और लो रिस्‍क प्रोडक्‍ट है। आप इसे निकटतम डाकघर से अपने नाम से नाबालिग के लिए या किसी अन्य वयस्क के साथ संयुक्त खाते के रूप में खरीद सकते हैं। एनएससी पांच साल की निश्चित मेच्‍योरिटी अवधि के साथ आता है। एनएससी की खरीद पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है, लेकिन केवल 1.5 लाख रुपए तक के निवेश से आपको आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत टैक्स छूट मिल सकती है। एनएससी में आपको सालाना 6.8 फीसदी रिटर्न मिल रहा है।

कौन कर सकता है एनएससी में निवेश?
एनएससी में वो कोई भी निवेश कर सकता है जो टैक्‍स सेविंग के साथ बचत भी करना चाहता है। एनएससी गारंटीड ब्याज और पूर्ण पूंजी सुरक्षा प्रदान करता है। सरकार ने एनएससी को देश भर में फैली डाकघर शाखाओं में उपलब्ध कराकर संभावित निवेशकों के लिए आसानी से सुलभ बना दिया है। इस योजना में हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) और ट्रस्ट निवेश नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भी एनएससी में रुपया नहीं लगा सकते हैं। यह योजना केवल व्यक्तिगत भारतीय निवासी नागरिकों के लिए है।

एनएससी की विशेषताएं और लाभ
निश्चित आय :
वर्तमान में, यह योजना निवेशकों के लिए 6.8 फीसदी की दर से गारंटीड रिटर्न दे रही है। एनएससी द्वारा दिया जाने वाला रिटर्न आमतौर पर एफडी से अधिक रहा है।
टैक्स सेवर : सरकार समर्थित टैक्स सेविंग स्कीम के रूप में, आप आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के प्रावधानों के तहत 1.5 लाख रुपए तक का दावा कर सकते हैं।
छोटी राश‍ि से शुरुआत करें : आप शुरुआती निवेश के रूप में 1,000 रुपए (या 100 रुपये के गुणक) जितना कम निवेश कर सकते हैं, और जब संभव हो तो राशि बढ़ा सकते हैं।
ब्याज दर : वर्तमान में, ब्याज दर 6.8 फीसदी प्रति वर्ष है, जिसे सरकार हर तिमाही में संशोधित करती है। यह सालाना कंपाउंडिंग होती है लेकिन परिपक्वता पर दी जाती है।
परिपक्वता अवधि : मेच्‍योरिटी अवधि पांच वर्ष है।

एक्सेस : आप इस योजना को किसी भी डाकघर से आवश्यक दस्तावेज जमा करके और केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया से गुजर कर खरीद सकते हैं। साथ ही सर्टिफिकेट को एक पोस्ट ऑफिस ब्रांच से दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर करना भी आसान है।
लोन की भी सुविधा : बैंक और एनबीएफसी सुरक्षित ऋण के लिए एनएससी को कोलेटरल के रूप में स्वीकार करते हैं। ऐसा करने के लिए संबंधित पोस्टमास्टर को सर्टिफिकेट पर ट्रांसफर स्टैंप लगाकर बैंक को ट्रांसफर करना करना होता है।
नॉमिनेशन : निवेशक परिवार के किसी सदस्य (यहां तक कि एक नाबालिग) को नॉमिनेशन में डाल सकता है। ताकि निवेशक के निधन की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में वे इसे विरासत में प्राप्त कर सकें।
मैच्योरिटी के बाद कॉर्पस : मैच्योरिटी पर, आपको पूरी मैच्योरिटी वैल्यू मिलेगी। चूंकि एनएससी भुगतान पर कोई टीडीएस नहीं है, ग्राहक को उस पर लागू कर का भुगतान करना चाहिए।
समय से पहले निकासी : आम तौर पर, कोई व्यक्ति इस योजना से जल्दी बाहर नहीं निकल सकता है। हालांकि, वे इसे असाधारण मामलों में स्वीकार करते हैं जैसे किसी निवेशक की मृत्यु या यदि इसके लिए अदालत का आदेश है।

एनएससी निवेश के कर लाभ
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में 1.5 लाख रुपए तक के निवेश से सब्सक्राइबर को सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिल सकती है। इसके अलावा, प्रमाणपत्रों पर अर्जित ब्याज भी प्रारंभिक निवेश में वापस जोड़ा जाता है और टैक्स ब्रेक के लिए भी योग्य होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप 1,000 रुपए के प्रमाण पत्र खरीदते हैं, तो आप पहले वर्ष में उस प्रारंभिक निवेश राशि पर कर छूट के पात्र हैं। लेकिन दूसरे वर्ष में, आप उस वर्ष एनएससी निवेश (निवेशों) के साथ-साथ पहले वर्ष में अर्जित ब्याज पर कर कटौती का दावा कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्याज को मूल निवेश में जोड़ा जाता है और सालाना चक्रवृद्धि होती है।