पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की जमानत याचिका खारिज, बलात्कार मामले में जेल में बंद बसपा सांसद को बचाने का है आरोप

गृह मंत्रालय के फैसले के बाद अमिताभ ठाकुर को सेवा के लिए अनुपयुक्त करार देते हुए इसी साल 23 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

लखनऊ की एक स्थानीय अदालत ने बलात्कार के मामले में जेल में बंद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद अतुल राय का बचाव करने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की जमानत याचिका बृहस्पतिवार को नामंजूर कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश पी. एम. त्रिपाठी ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पर लगे इल्जाम गंभीर किस्म के हैं और उनकी जांच अभी की जा रही है, लिहाजा उसे अभी जमानत नहीं दी जा सकती।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ पिछले 27 अगस्त को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इसमें कहा गया था कि गाजीपुर जिले की रहने वाली एक महिला ने वाराणसी के लंका थाने में बसपा सांसद अतुल राय के खिलाफ बलात्कार के आरोप में मामला दर्ज कराया था। इस मामले में सांसद को गिरफ्तार किया गया और वे अभी नैनी जेल में बंद हैं।

आरोप है कि इसके बाद उक्त महिला के खिलाफ बदले की कार्यवाही करते हुए कई मामले दर्ज करा दिए गए थे। इससे परेशान होकर महिला ने 20 नवंबर 2020 को वाराणसी के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक को एक अर्जी देकर आरोप लगाया था कि अमिताभ ठाकुर अतुल राय को बचाने के लिए उसके खिलाफ फर्जी सबूत गढ़ रहे हैं। 

महिला ने 16 अगस्त को फेसबुक पर बसपा सांसद अतुल  राय और पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ बयान दिया था। उसके बाद उसने और उसके दोस्त ने उच्चतम न्यायालय के सामने खुद को आग लगा ली थी। बाद में इलाज के दौरान अस्पताल में दोनों की मौत हो गई थी। फेसबुक पर लाइव दिए गए बयान को पीड़िता का मृत्यु पूर्व बयान माना गया।

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय के फैसले के बाद अमिताभ ठाकुर को सेवा के लिए अनुपयुक्त करार देते हुए इसी साल 23 मार्च को जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। वैसे उन्हें वर्ष 2028 में सेवानिवृत्त होना था।